संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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[ १३ ]
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| ( ६ ) नागरखण्ड ( पूर्वार्ध ) | ३८१. परशुरामद्वारा लोहयष्टिकी स्थापना और उसकी महिमा तथा देवीकुण्डका माहात्म्य .......... | १११८ | |
| ३५६. राजा त्रिशंकुका वसिष्ठ-पुत्रोंके शापसे चाण्डाल होना .................................................... | १०६३ | ३८२. राजवापीके प्रसंगमें राजा दशरथका प्रभाव, शनैश्चरग्रहकी पराजय ........................... | ११२२ |
| ३५७. विश्वामित्रजीके द्वारा त्रिशंकुका यज्ञ पूरा करके नूतन सृष्टि-रचनाका उद्योग आदि .......... | १०६५ | ३८३. श्रीरामके द्वारा लक्ष्मणका त्याग और लक्ष्मणका परमधाम-गमन ................................... | ११२३ |
| ३५८. नागबिलका महत्त्व, इन्द्रकी ब्रह्महत्यासे मुक्ति | १०६७ | ३८४. चित्रशर्मा तथा अन्यान्य ब्राह्मणोंके द्वारा भगवान् शंकरको सन्तुष्ट करना.......................... | ११२७ |
| ३५९. शंखतीर्थकी उत्पत्ति, उसमें स्नानसे राजा चमत्कारके कुष्ठरोगकी निवृत्ति ................ | १०६९ | ३८५. अड़सठ क्षेत्रों और उनमें भी प्रधान आठ क्षेत्रोंके नाम तथा उनके कीर्तनका महत्त्व | ११२८ |
| ३६०. राजा चमत्कारकी तपस्यासे सन्तुष्ट हुए शिवका अचलेश्वररूपसे निवास ........................ | १०७१ | ३८६. भगवान् शिवके दिये हुए मन्त्रद्वारा ब्राह्मणोंपर आये हुए सर्पोंके उपद्रवका निवारण ...... | ११२९ |
| ३६१. चमत्कारपुरमें गयाशीर्षतीर्थकी महिमा ........ | १०७२ | ३८७. चमत्कारपुरमें पुनर्वासी ब्राह्मणोंकी संख्या ... | ११३१ |
| ३६२. मार्कण्डेयमुनिको अमरत्वकी प्राप्ति, ब्रह्माजीकी स्थापना, बालसख्यतीर्थकी महिमा .......... | १०७७ | ३८८. रैवत और क्षेमंकरी द्वारा रैवतेश्वर तथा कात्यायनी-की स्थापना ........................................ | ११३२ |
| ३६३. मृगपदतीर्थ और विष्णुपदतीर्थका प्रादुर्भाव तथा माहात्म्य, विष्णुपदीमें स्नान आदिका महत्त्व . | १०७९ | ३८९. दुर्वासाके शापसे चित्रसम दैत्यका महिष होना तथा कात्यायनीके द्वारा महिषका वध........ | ११३३ |
| ३६४. विष्णुपदीकी अद्भुत महिमा, चण्डशर्माकी शुद्धि .... | १०८० | ३९०. केदारक्षेत्रका प्रादुर्भाव तथा वहाँ भगवान् शिवकी आराधनाका माहात्म्य ........................... | ११३७ |
| ३६५. हाटकेश्वरक्षेत्रकी दक्षिणोत्तर सीमाके गोकर्णोंका परिचय, गोकर्ण और यमका संवाद .......... | १०८२ | ३९१. शुक्लतीर्थकी महिमा ............................... | ११३९ |
| ३६६. सिद्धेश्वर लिङ्गकी महिमा तथा षडक्षर-मन्त्रका माहात्म्य एवं अहिंसाकी महत्ताका वर्णन .. | १०८४ | ३९२. कर्णोत्पलातीर्थकी उत्पत्ति, राजा सत्यसन्ध और कर्णोत्पलाकी अद्भुत कथा ................... | ११४१ |
| ३६७. सप्तर्षि आश्रमकी महिमा तथा सप्तर्षियोंका हाटकेश्वरक्षेत्रमें आगमन .......................... | १०८९ | ३९३. शाण्डिलीके उपदेशसे कात्यायनीके द्वारा पञ्चपिण्डा गौरीकी उपासना ............................... | ११४३ |
| ३६८. अगस्त्य-आश्रममें शिव-पूजा आदिका माहात्म्य.... | १०९१ | ३९४. वास्तुपदतीर्थ तथा अजागृहा देवीकी महिमा. | ११४४ |
| ३६९. दुर्वासा-लोमहर्षण-संवाद, मन्त्र-सिद्धिकी विधि .... | १०९२ | ३९५. पतिव्रताकी शक्तिसे उसके मरे हुए पतिको पुनः नवजीवनकी प्राप्ति ....................... | ११४६ |
| ३७०. धुन्धुमारे श्वरकी स्थापना और महिमा ........ | १०९३ | ३९६. शूलीतीर्थ और दीर्घिकातीर्थका प्राकट्य, माण्डव्य मुनिका धर्मराजको शाप ...................... | ११४८ |
| ३७१. विश्वामित्रका मेनकासे वार्तालाप, सती स्त्रियोंके पालन करनेयोग्य धर्मका वर्णन ............... | १०९५ | ३९७. अन्न और जलके दानकी महत्ता ............. | ११५० |
| ३७२. सरस्वत्तीर्थकी महिमा, राजा अम्बुवीचिकी मूकताका निवारण .............................. | १०९७ | ३९८. अदितिदेवीद्वारा आराधित अमरेश्वर लिंगकी महिमा ..................................... | ११५१ |
| ३७३. महाकालके समीप जागरणकी महिमा, राजा रुद्रसेनका पूर्ववृत्तान्त ............................ | १०९९ | ३९९. शुकदेवजीका जन्म, वैराग्य, व्यासजीके साथ उनका संवाद और वनगमन................... | ११५३ |
| ३७४. कलशेश्वरका माहात्म्य, नन्दीके द्वारा व्याघ्रयोनिको प्राप्त राजा कलशका शापसे उद्धार ......... | ११०१ | ४००. राजा सुरथके द्वारा भैरवजीकी स्थापना और आराधना .......................................... | ११५५ |
| ३७५. अगस्त्यकुण्ड, कपिला नदी, वैष्णवीशिला और सिद्धक्षेत्र आदिकी महिमा ....................... | ११०५ | ४०१. गौरी, जया और विजयाकुण्डका माहात्म्य. | ११५६ |
| ३७६. गालवको सूर्यदेवकी आराधनासे पुत्रकी प्राप्ति | ११०७ | नागरखण्ड ( उत्तरार्ध ) | |
| ३७७. चमत्कारीदेवीकी महिमा, कार्तिकेयजीके द्वारा शक्तिकी स्थापना ................................. | १११० | ४०२. सब पापोंकी शुद्धिके लिये पुरश्चरणसप्तमी व्रतकी विधि एवं महिमा ........................ | ११५७ |
| ३७८. स्कन्दस्वामी और देवयजनकी महिमा तथा तीनों सूर्य-विग्रहोंके दर्शनका माहात्म्य ...... | १११३ | ४०३. चण्डशर्माके द्वारा सत्ताईस शिवलिंगोंका पूजन | ११५९ |
| ३७९. चन्द्रदेवके मंदिरके निर्माणका महत्त्व, अम्बावृद्धाके दर्शनकी महत्ता ................................... | १११४ | ४०४. विश्वामित्रकी उत्पत्ति, राज्यप्राप्ति तथा राज्य त्यागकर तप करनेका निश्चय ................. | ११६२ |
| ३८०. ब्रह्मकुण्ड, गोमुखतीर्थकी उत्पत्तिकथा एवं महिमा ........................................ | १११७ | ४०५. विश्वामित्रकी तपस्या, ब्राह्मण पदकी प्राप्ति .. | ११६४ |