भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
( ६ ) नागरखण्ड ( पूर्वार्ध )३८१. परशुरामद्वारा लोहयष्टिकी स्थापना और उसकी महिमा तथा देवीकुण्डका माहात्म्य ..........१११८
३५६. राजा त्रिशंकुका वसिष्ठ-पुत्रोंके शापसे चाण्डाल होना ....................................................१०६३३८२. राजवापीके प्रसंगमें राजा दशरथका प्रभाव, शनैश्चरग्रहकी पराजय ...........................११२२
३५७. विश्वामित्रजीके द्वारा त्रिशंकुका यज्ञ पूरा करके नूतन सृष्टि-रचनाका उद्योग आदि ..........१०६५३८३. श्रीरामके द्वारा लक्ष्मणका त्याग और लक्ष्मणका परमधाम-गमन ...................................११२३
३५८. नागबिलका महत्त्व, इन्द्रकी ब्रह्महत्यासे मुक्ति१०६७३८४. चित्रशर्मा तथा अन्यान्य ब्राह्मणोंके द्वारा भगवान् शंकरको सन्तुष्ट करना..........................११२७
३५९. शंखतीर्थकी उत्पत्ति, उसमें स्नानसे राजा चमत्कारके कुष्ठरोगकी निवृत्ति ................१०६९३८५. अड़सठ क्षेत्रों और उनमें भी प्रधान आठ क्षेत्रोंके नाम तथा उनके कीर्तनका महत्त्व११२८
३६०. राजा चमत्कारकी तपस्यासे सन्तुष्ट हुए शिवका अचलेश्वररूपसे निवास ........................१०७१३८६. भगवान् शिवके दिये हुए मन्त्रद्वारा ब्राह्मणोंपर आये हुए सर्पोंके उपद्रवका निवारण ......११२९
३६१. चमत्कारपुरमें गयाशीर्षतीर्थकी महिमा ........१०७२३८७. चमत्कारपुरमें पुनर्वासी ब्राह्मणोंकी संख्या ...११३१
३६२. मार्कण्डेयमुनिको अमरत्वकी प्राप्ति, ब्रह्माजीकी स्थापना, बालसख्यतीर्थकी महिमा ..........१०७७३८८. रैवत और क्षेमंकरी द्वारा रैवतेश्वर तथा कात्यायनी-की स्थापना ........................................११३२
३६३. मृगपदतीर्थ और विष्णुपदतीर्थका प्रादुर्भाव तथा माहात्म्य, विष्णुपदीमें स्नान आदिका महत्त्व .१०७९३८९. दुर्वासाके शापसे चित्रसम दैत्यका महिष होना तथा कात्यायनीके द्वारा महिषका वध........११३३
३६४. विष्णुपदीकी अद्भुत महिमा, चण्डशर्माकी शुद्धि ....१०८०३९०. केदारक्षेत्रका प्रादुर्भाव तथा वहाँ भगवान् शिवकी आराधनाका माहात्म्य ...........................११३७
३६५. हाटकेश्वरक्षेत्रकी दक्षिणोत्तर सीमाके गोकर्णोंका परिचय, गोकर्ण और यमका संवाद ..........१०८२३९१. शुक्लतीर्थकी महिमा ...............................११३९
३६६. सिद्धेश्वर लिङ्गकी महिमा तथा षडक्षर-मन्त्रका माहात्म्य एवं अहिंसाकी महत्ताका वर्णन ..१०८४३९२. कर्णोत्पलातीर्थकी उत्पत्ति, राजा सत्यसन्ध और कर्णोत्पलाकी अद्भुत कथा ...................११४१
३६७. सप्तर्षि आश्रमकी महिमा तथा सप्तर्षियोंका हाटकेश्वरक्षेत्रमें आगमन ..........................१०८९३९३. शाण्डिलीके उपदेशसे कात्यायनीके द्वारा पञ्चपिण्डा गौरीकी उपासना ...............................११४३
३६८. अगस्त्य-आश्रममें शिव-पूजा आदिका माहात्म्य....१०९१३९४. वास्तुपदतीर्थ तथा अजागृहा देवीकी महिमा.११४४
३६९. दुर्वासा-लोमहर्षण-संवाद, मन्त्र-सिद्धिकी विधि ....१०९२३९५. पतिव्रताकी शक्तिसे उसके मरे हुए पतिको पुनः नवजीवनकी प्राप्ति .......................११४६
३७०. धुन्धुमारे श्वरकी स्थापना और महिमा ........१०९३३९६. शूलीतीर्थ और दीर्घिकातीर्थका प्राकट्य, माण्डव्य मुनिका धर्मराजको शाप ......................११४८
३७१. विश्वामित्रका मेनकासे वार्तालाप, सती स्त्रियोंके पालन करनेयोग्य धर्मका वर्णन ...............१०९५३९७. अन्न और जलके दानकी महत्ता .............११५०
३७२. सरस्वत्तीर्थकी महिमा, राजा अम्बुवीचिकी मूकताका निवारण ..............................१०९७३९८. अदितिदेवीद्वारा आराधित अमरेश्वर लिंगकी महिमा .....................................११५१
३७३. महाकालके समीप जागरणकी महिमा, राजा रुद्रसेनका पूर्ववृत्तान्त ............................१०९९३९९. शुकदेवजीका जन्म, वैराग्य, व्यासजीके साथ उनका संवाद और वनगमन...................११५३
३७४. कलशेश्वरका माहात्म्य, नन्दीके द्वारा व्याघ्रयोनिको प्राप्त राजा कलशका शापसे उद्धार .........११०१४००. राजा सुरथके द्वारा भैरवजीकी स्थापना और आराधना ..........................................११५५
३७५. अगस्त्यकुण्ड, कपिला नदी, वैष्णवीशिला और सिद्धक्षेत्र आदिकी महिमा .......................११०५४०१. गौरी, जया और विजयाकुण्डका माहात्म्य.११५६
३७६. गालवको सूर्यदेवकी आराधनासे पुत्रकी प्राप्ति११०७नागरखण्ड ( उत्तरार्ध )
३७७. चमत्कारीदेवीकी महिमा, कार्तिकेयजीके द्वारा शक्तिकी स्थापना .................................१११०४०२. सब पापोंकी शुद्धिके लिये पुरश्चरणसप्तमी व्रतकी विधि एवं महिमा ........................११५७
३७८. स्कन्दस्वामी और देवयजनकी महिमा तथा तीनों सूर्य-विग्रहोंके दर्शनका माहात्म्य ......१११३४०३. चण्डशर्माके द्वारा सत्ताईस शिवलिंगोंका पूजन११५९
३७९. चन्द्रदेवके मंदिरके निर्माणका महत्त्व, अम्बावृद्धाके दर्शनकी महत्ता ...................................१११४४०४. विश्वामित्रकी उत्पत्ति, राज्यप्राप्ति तथा राज्य त्यागकर तप करनेका निश्चय .................११६२
३८०. ब्रह्मकुण्ड, गोमुखतीर्थकी उत्पत्तिकथा एवं महिमा ........................................१११७४०५. विश्वामित्रकी तपस्या, ब्राह्मण पदकी प्राप्ति ..११६४