भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
४०६. पंचपिण्डिका गौरी-पूजासे अमाकी सौभाग्यवृद्धि ..११६५४३७. प्रभासमें भगवान् शिवका स्वरूप, पार्वतीद्वारा उनकी स्तुति ....................................१२२३
४०७. पूर्वजन्ममें अमारूपा लक्ष्मीदेवीके द्वारा पंचपिण्डिका गौरीकी उत्पत्ति ..............११६७४३८. प्रभासमें सूर्यदेव, सिद्धेश्वरलिंग तथा सिद्धलिंगकी महिमा ........................................१२२५
४०८. हाटकेश्वरक्षेत्रमें तीनों पुष्कर तीर्थोंके आगमनका वृत्तान्त .....................................११७०४३९. अर्कस्थलका माहात्म्य, आदित्यकी महिमा, दन्तधावनकी विधि ...........................१२२६
४०९. अतिथि-सत्कारका माहात्म्य .....................११७१४४०. चन्द्रमाकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा ओषधि आदिका पोषण ...............................१२२९
४१०. हाटकेश्वरक्षेत्रमें पुष्करके प्राकट्यका वार्षिक समय११७२४४१. सृष्टि-कथा—दक्षकन्याओं तथा धर्म एवं कश्यपजीकी संततिका संक्षिप्त वर्णन.......१२३०
४११. ब्राह्मणकन्या और राजकन्याका अनुपम प्रेम११७३४४२. चन्द्रमाके द्वारा प्रभासक्षेत्रमें शिवकी आराधना१२३१
४१२. परावसुके द्वारा मद्यपानका प्रायश्चित्त .........११७४४४३. सोमवारव्रतकी विधि और महिमा, गन्धर्व-सेनाकी रोगनिवृत्ति ............................१२३५
४१३. ब्राह्मणकन्या और शूद्रराजकन्याकी तपस्या, भगवान् शिवका वरदान...........................११७७४४४. सोमनाथकी यात्रा-विधि .........................१२३७
४१४. त्रिविध क्षेत्र, अरण्य और पुरी आदिका वर्णन११७९४४५. समुद्रमें स्नानकी विधि और महिमा.........१२४१
४१५. अहल्याका शापोद्धार तथा हाटकेश्वरक्षेत्रमें अहल्या, शतानन्द और गौतमजीकी तपस्या११८१४४६. सोमनाथके दर्शन-पूजनकी महिमा ...........१२४२
४१६. शंखतीर्थकी महिमा, राजा दम्भका चरित्र तथा ताम्बूलके दोष...............................११८२४४७. सरस्वती नदीकी महिमा तथा वहाँ स्नान, दान और श्राद्धका माहात्म्य ..................१२४४
४१७. विश्वामित्रतीर्थ एवं रत्नादित्यकी महिमा ....११८४४४८. 'कपर्दी'की अग्रपूजाका हेतु और महिमा ..१२४५
४१८. श्राद्धकल्प .......................................११८७४४९. केदारलिंगकी महिमा, राजा शशिविन्दुके पूर्व-जन्मका वृत्तान्त .............................१२४६
४१९. श्राद्धकी आवश्यकता तथा समय ............११८८४५०. श्वेतकेत्वीश्वर आदि विभिन्न शिवलिंगोंका माहात्म्य१२४८
४२०. श्राद्धकी विधि, विहित और निषिद्ध ब्राह्मण तथा मन्वादिका वर्णन...........................११९०४५१. प्रभासक्षेत्रकी त्रिविध शक्तियों तथा दूती शक्तियोंके दर्शन-पूजनका माहात्म्य ..................१२५०
४२१. श्राद्धकर्ता और श्राद्धभोक्ताके लिये नियम .....११९२४५२. भैरवेश्वर आदि विविध लिंगोंका माहात्म्य१२५२
४२२. सपिण्डनकी आवश्यकता, तीन गति ........११९४४५३. कलकलेश्वर, उतंकलेश्वर, वैश्वानरेश्वर तथा गौतमेश्वरकी महिमा...........................१२५४
४२३. नरकों और पापोंसे मुक्त होनेका उपाय तथा भगवान् जलशायीकी महिमा ...............११९७४५४. वैष्णवक्षेत्रमें भगवान् दैत्यसूदनकी महिमा .....१२५५
४२४. चातुर्मास्य व्रतके पालनीय नियम और उनकी महिमा ........................................११९८४५५. योगेश्वरीदेवीकी महिमा ...........................१२५७
४२५. शिवरात्रिकी महिमा ...............................१२००४५६. आदिनारायणका माहात्म्य .....................१२५८
४२६. सिद्धेश्वरकी महिमा और तुलादानका महत्त्व .१२०२४५७. पाण्डवेश्वरलिंग तथा ग्यारह रुद्रोंका माहात्म्य१२५९
४२७. पृथ्वीदानकी महिमा ...............................१२०३४५८. चन्द्रेश्वर, चक्रपाणि, दण्डपाणि तथा साम्बा-दित्यकी महिमा ...............................१२६२
४२८. चार प्रकारके कालमानका वर्णन .............१२०४४५९. बालरूपधारी ब्रह्माकी महिमा, ब्रह्माजीकी आयुका मान ..................................१२६३
४२९. निम्बेश्वरकी स्थापना तथा ग्यारह रुद्रोंका प्राकट्य१२०८४६०. ब्राह्मणोंकी महिमा, क्षेत्रवासी ब्राह्मणोंके भेद१२६५
४३०. नागरखण्डका उपसंहार ..........................१२१०४६१. ब्रह्माजीके प्रति भक्तिके भेद तथा उनके एक सौ आठ नाम ......................................१२६७
(७) प्रभासखण्ड४६२. प्रत्यूषेश्वर, अनिलेश्वर, प्रभासेश्वर, रामेश्वर, लक्ष्मणेश्वर आदिका माहात्म्य .............१२६९
४३१. सूतजीके द्वारा प्रभास-खण्डका उपक्रम .....१२११४६३. गोप्यादित्यकी स्थापना और महिमा तथा नीलसे हानि ...................................१२७२
४३२. शिव-पार्वती-संवाद, तीर्थोंका संक्षिप्त वर्णन१२१५
४३३. प्रभासतीर्थकी सीमा, क्षेत्र-विभाग, महिमा तथा रक्षकगणोंका वर्णन .......................१२१७
४३४. सोमनाथके दिव्य स्वरूपका दिग्दर्शन ........१२१९
४३५. सोमनाथके आठ नाम और पार्वतीके अठारह नामोंका वर्णन ...............................१२२०
४३६. सोमनाथकी महिमा .................................१२२२