संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| ४६४. रामेश्वर, चित्रांगदेश्वर तथा रावणेश्वरकी महिमा ... | १२७३ | ४८८. पृथुके गोष्पदतीर्थमें श्राद्ध-यज्ञ करनेसे वेनको स्वर्गप्राप्ति.................................. | १३१९ |
| ४६५. पौलोमीश्वर, शाण्डिल्येश्वर, क्षेमेश्वर तथा सागरादित्यका माहात्म्य ..................... | १२७३ | ४८९. नारायणगृह तथा जालेश्वर-लिंगकी महिमा | १३२० |
| ४६६. अक्षमालेश्वर, पाशुपतेश्वर, ध्रुवेश्वर तथा सिद्धि-लक्ष्मीकी महिमा .................................... | १२७५ | ४९०. चन्द्रेश्वर, कपिलेश्वर तथा नलेश्वरकी महिमा | १३२३ |
| ४६७. महाकाली देवी, पुष्करावर्तका नदी एवं कंकाल-भैरवकी महिमा........................... | १२७६ | ४९१. राजा गज और भद्रमुनिका संवाद ............ | १३२४ |
| ४६८. लोमशेश्वर, चित्रपथा नदी, रूपकुण्ड, रत्नेश्वर तथा वैनतेयेश्वरका माहात्म्य..................... | १२७८ | ४९२. तीर्थमें पूजन, श्राद्ध और दानकी महिमा... | १३२७ |
| ४६९. रैवन्त और अनन्तेश्वरकी महिमा, सावित्रीकी कथा, सावित्रीव्रतकी महिमा ................. | १२७९ | ४९३. राजा बलिके राज्यकी प्रशंसा ................. | १३२९ |
| ४७०. शालकंटकटा देवी, दशरथेश्वर, भरतेश्वर आदिका महत्त्व .................................... | १२८३ | ४९४. देवर्षि नारदका वामनजीको मत्स्य आदि अवतारोंका वृत्तान्त सुनाना................... | १३३१ |
| ४७१. देवमाता, शेषस्थान, प्रभासपंचक तथा संगममें स्नानका महत्त्व ..................................... | १२८४ | ४९५. वामनजीका बलिसे तीन पग भूमि ग्रहण करना ........................................ | १३३५ |
| ४७२. श्राद्धके विषयमें कुछ ज्ञातव्य बातें........... | १२८५ | ( श्रीद्वारका-माहात्म्य ) | |
| ४७३. श्राद्ध-विधि, सप्तशुद्धिका विचार, श्राद्धमें ग्राह्य एवं त्याज्यका निर्णय .............................. | १२८८ | ४९६. भगवान्के परमधाम पधारनेपर महर्षियोंका ब्रह्माजीकी आज्ञासे प्रह्लादजीके समीप जाना | १३३९ |
| ४७४. परायी वस्तुके अपहरण और प्रतिग्रहके दोष | १२९२ | ४९७. द्वारकाकी महिमा, वहाँकी यात्रा और उसमें योग देनेका माहात्म्य ........................... | १३४१ |
| ४७५. उत्तम-अधम जन्म, व्यर्थ और सफल दान, सुपात्रके लक्षण ................................... | १२९४ | ४९८. गोमतीमें स्नान और भगवत्पूजनकी महिमा | १३४४ |
| ४७६. मार्कण्डेयेश्वर आदि विविध लिंगोंकी महिमा | १२९५ | ४९९. चक्रतीर्थ तथा रुक्मिणीह्रदका माहात्म्य...... | १३४५ |
| ४७७. गौतम और प्रेतका संवाद, प्रेतोंका उद्धार तथा प्रेततीर्थकी उत्पत्ति ................................ | १२९६ | ५००. विष्णुपदोद्भवतीर्थकी महिमा, उद्धवजीका व्रजमें आगमन................................... | १३४६ |
| ४७८. नरकेश्वरका माहात्म्य ............................ | १२९९ | ५०१. गोपी-सरोवरका निर्माण और उसकी महिमाका वर्णन ................................................. | १३५० |
| ४७९. संवर्तेश्वर, बलभद्रेश्वर, दशाश्वमेधिक तीर्थ तथा दुर्वासादित्यका माहात्म्य ................. | १३०० | ५०२. ब्रह्मकुण्ड, चन्द्रसरोवर तथा पंचनदतीर्थका माहात्म्य .......................................... | १३५१ |
| ४८०. नागरादित्य, पिंगा नदी, संगमेश्वर तथा गंगेश्वरकी महिमा ................................... | १३०१ | ५०३. सिद्धेश्वर लिंग, ऋषितीर्थ और देवी-देवताओंके सेवनकी महिमा .................................... | १३५२ |
| ४८१. नन्दादित्य, पर्णादित्य, गंगेश्वर तथा मूल स्थानगत सूर्यकी महिमा ..................................... | १३०२ | ५०४. श्रीकृष्ण तथा रुक्मिणीदेवीके दर्शन और पूजनकी महिमा.................................... | १३५४ |
| ४८२. भगवान् सूर्यके अष्टोत्तरशतनामोंकी महिमा | १३०६ | ५०५. द्वारकापुरी तथा वहाँ श्रीकृष्णके दर्शन-पूजनका माहात्म्य ............................................. | १३५५ |
| ४८३. महर्षि च्यवनकी कथा और च्यवनेश्वरकी महिमा .............................................. | १३०७ | ५०६. शंखोद्धारतीर्थकी महिमा ........................ | १३५७ |
| ४८४. सुकन्या-सरोवर, गोष्पदतीर्थ तथा कुबेरेश्वरकी महिमा ............................................... | १३०९ | ५०७. द्वारकापुरी, गोपीचन्दन तथा गोमतीका माहात्म्य | १३५८ |
| ४८५. भद्रकाली, कुबेर तथा गुप्तप्रयागका माहात्म्य | १३११ | ५०८. एकादशीकी रात्रिमें श्रीहरिके समीप जागरणका माहात्म्य ............................................. | १३६० |
| ४८६. माधव, शृगालेश्वर और देवविग्रहोंके सेवनकी महिमा ................................... | १३१३ | ५०९. द्वारका-यात्राकी विधि एवं महिमा ........... | १३६२ |
| ४८७. तलस्वामी, शंखावर्ततीर्थ और गोष्पद-तीर्थकी महिमा...................................... | १३१५ | ५१०. ऋषियों और देवताओंकी द्वारका-यात्रा तथा भगवद्दर्शन एवं पूजन ............................ | १३६४ |
| ५११. दिलीप-वसिष्ठ-संवाद ........................... | १३६५ | ||
| ५१२. द्वारकापुरी तथा श्रीकृष्ण-दर्शनका माहात्म्य | १३६६ | ||
| ५१३. द्वारकामें श्रीकृष्णदर्शनकी महिमा.............. | १३६८ | ||
| ५१४. द्वारका-माहात्म्यके पाठकी महिमा........... | १३७१ |
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