संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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[ १६ ]
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
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चित्र-सूची
इकरंगे
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| १. दक्षके द्वारा सतीका तिरस्कार ........................ | ६ | २९. रानी सुमित्राके द्वारा अपने पति और पुत्रकी दशाका वर्णन .................................................. | ५४२ |
| २. वीरभद्रद्वारा दक्षयज्ञ-विध्वंस ........................ | ९ | ३०. हनुमान्जीके द्वारा भगवान् श्रीराम और सीताका स्तवन .................................................. | ५८३ |
| ३. गरुड़पर मन्दराचल .................................... | २१ | ३१. ब्राह्मणके द्वारा राजकन्याका हाथ पकड़ा जाना | ५९० |
| ४. समुद्र-मन्थन ........................................ | २१ | ३२. राजाके द्वारा ब्राह्मणको बन्दी बनाया जाना ... | ५९० |
| ५. समुद्र-मन्थनसे श्रीमहालक्ष्मीका प्रादुर्भाव........ | २३ | ३३. राजाको स्वप्नमें भगवान्के दर्शन ............ | ५९२ |
| ६. श्रीलक्ष्मीका भगवान्को माला-अर्पण .......... | २३ | ३४. राजाके द्वारा लक्ष्मीनारायणका स्तवन ........... | ५९२ |
| ७. ब्राह्मणोंसे घिरे हुए देवर्षि नारदजीके साथ अर्जुनका संवाद ............................................ | ८७ | ३५. गणेशजीका मस्तक-छेदन ........................ | ६२४ |
| ३६. गणेशजीको गजमस्तक-दान ........................ | ६२४ | ||
| ८. त्रिदेवोंकी श्रेष्ठता .................................... | १५७ | ३७. भगवान् रामचन्द्रका दान ........................ | ६४२ |
| ९. अर्चार्विग्रहसे प्रकट होकर भगवान् विष्णु ऐतरेयको दर्शन दे रहे हैं ............................................ | १७६ | ३८. ब्रह्माजीका प्राकट्य ................................ | ६५५ |
| ३९. ध्रुवकी सफल साधना ................................ | ७५७ | ||
| १०. मुर-कन्याको न मारनेके लिये श्रीकृष्णसे कामाख्याका अनुरोध.................................... | २२१ | ### इकरंगे (लाइन) | |
| ११. बर्बरीकका बल-प्रदर्शन ............................ | २३५ | १. लोमशजीद्वारा नैमिषारण्यमें मुनियोंको शिवजीका माहात्म्य-कथन .......................................... | १ |
| १२. राजा वज्रांगदपर भगवान् अरुणाचलेश्वरकी कृपा .................................................... | २६० | २. दक्षद्वारा भगवान् शंकरका स्तवन ............ | ११ |
| १३. पद्मालय और भगवान्का परस्पर माला पहनाना................................................ | २७५ | ३. भगवान् विष्णुके द्वारा देवताओंको आश्वासन | १५ |
| ४. मोहिनीद्वारा देवताओंको अमृतरसपान............ | २६ | ||
| १४. भूदेवी तथा श्रीदेवीसहित सपरिकर भगवान् विष्णु............................................ | २७९ | ५. त्वष्टाका ब्रह्माजीसे पुत्र-प्राप्तिके लिये वर माँगना | ३३ |
| १५. भक्त भीम कुम्हारका पत्नीसहित विमानारोहण............................................ | २८३ | ६. इन्द्रका बृहस्पतिजीसे प्रदोषव्रतकी उद्यापन-विधि पूछना ............................................ | ३९ |
| १६. ब्रह्मा और यमराजके द्वारा भगवान् विष्णुका स्तवन .................................................... | ३२१ | ७. जुआरीका स्वर्गमें ऋषि-मुनियोंको अंधाधुंध दान देना .................................................. | ४६ |
| १७. राजा इन्द्रद्युम्नको ध्यानमें भगवान्के दर्शन .... | ३५५ | ८. विरोचनद्वारा ब्राह्मणरूपधारी इन्द्रको अपना मस्तक उतारकर देना.................................... | ४७ |
| १८. भगवान् विष्णुको लक्ष्मीदेवी भोजन परोस रही हैं .................................................... | ३७८ | ९. भगवान् विष्णुका बलि और उसकी पत्नीको वरदान देना ............................................ | ५० |
| १९. राजा श्वेतको भगवान् लक्ष्मीनृसिंहके दिव्य दर्शन ............................................ | ३७९ | १०. पार्वतीजीके तपसे जगत् सन्तप्त होनेपर देवताओंद्वारा ब्रह्माजीकी शरण लेना............ | ५६ |
| २०. रत्नहिंडोलेपर भगवान् लक्ष्मीनारायण .......... | ३८५ | ११. तपस्यामें लगी हुई पार्वतीजीको भगवान् शंकरका दर्शन तथा परस्पर वार्तालाप ........................ | ६० |
| २१. कदम्बमूलमें भगवान् गोविन्द झूला झूल रहे हैं | ३८६ | १२. पार्वतीजीका कुमार षडाननको गोदमें लेनेके लिये उनकी ओर बढ़ना ................................ | ७० |
| २२. वटवृक्षसे देवताओंका निकलना................ | ४२० | ||
| २३. भक्त विष्णुदासके द्वारा चाण्डालकी सेवा ..... | ४३४ | १३. कार्तिकेयजीके शक्ति-प्रहारसे तारककी मृत्यु.. | ७४ |
| २४. चाण्डालके स्थानपर विष्णुदासको भगवान्का दर्शन .................................................... | ४३४ | १४. कैलाशमें शिवजीका राज्य ........................ | ८२ |
| २५. हेमकान्तके द्वारा त्रितमुनिको छत्र-जल-दान.. | ४७९ | १५. अर्जुनके द्वारा पंचाप्सरस्तीर्थमें ग्राह बनी अप्सराओंका उद्धार.................................... | ८६ |
| २६. छत्र और जलदानसे हेमकान्तपर भगवत्कृपा.. | ४७९ | १६. धर्मवर्माका छद्मरूपमें पधारे हुए नारदजीसे परिचय पूछना ........................................ | ९८ |
| २७. सर्वस्व दानी रघु और ब्राह्मण कौत्स.......... | ५१६ | ||
| २८. सुदर्शनचक्रके द्वारा गालवमुनिकी रक्षा.......... | ५३८ |