भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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२६६ * संक्षिप्त स्कन्दपुराण *


और उसपर मैं विराजमान हूँ। इस प्रकार ध्यान करके जो सदा अष्टोत्तरशत मन्त्रका जप करता है, वह सम्पूर्ण कामनाओंको पाता और अन्तमें निश्चय ही मोक्ष प्राप्त कर लेता है।

यह सुनकर पृथ्वीदेवीने पुनः प्रश्न किया— देव! पूर्वकालमें किसने इस मन्त्रका अनुष्ठान किया है और उसे किस फलकी प्राप्ति हुई है?

भगवान् वराहने कहा—देवि! पहले कृतयुगमें धर्म नामक महात्मा मनुने ब्रह्माजीसे इस मन्त्रको प्राप्त किया और इसी पर्वतपर उसका जप करके मेरा प्रत्यक्ष दर्शन पाया। फिर मुझसे अभीष्ट वरदान प्राप्त करके वे मेरे पदको प्राप्त हो गये। पूर्वकालमें इन्द्र दुर्वासाके शापसे स्वर्गभ्रष्ट हो गये थे; उस समय इसी मन्त्रसे यहीं मेरी आराधना करके उन्होंने पुनः स्वर्गका राज्य प्राप्त कर लिया। भूदेवि! अन्यान्य मुनियोंने भी इस मन्त्रका जप करके परम गति प्राप्त की है। सर्पोंके स्वामी अनन्तने कश्यपजीसे इस मन्त्रको पाकर श्वेत-द्वीपमें इसका जप किया और उसीसे अद्भुत शक्ति पाकर वे पृथ्वीको धारण करनेमें समर्थ हुए हैं। अतः पृथ्वीकी अभिलाषा रखनेवाले मनुष्योंको इहलोकमें सदा ही इस मन्त्रका जप करना चाहिये।

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महर्षि अगस्त्यकी प्रार्थनासे भगवान् विष्णुका वेंकटाचलपर श्री-भू देवियोंके साथ निवास तथा आकाशराजके यहाँ पद्मावती और वसुदानका जन्म

भगवान् वराह कहते हैं— महादेवी पृथ्वी! मैं तुम्हें एक पवित्र इतिहास सुनाता हूँ, सुनो। वैवस्वत मन्वन्तरके आदि सत्ययुगमें वायु देवताका बड़ा भारी तप देखकर लक्ष्मीनिवास भगवान् विष्णु श्रीदेवी और भूदेवीके साथ स्वामिपुष्करिणीके तटपर आये। इसके दक्षिण तटपर परम पवित्र आनन्द नामक विमानमें वे श्रीलक्ष्मीकान्त विष्णु सदा वायु देवताका प्रिय करते हुए निवास करते हैं। तभीसे कुमार कार्तिकेयद्वारा निरन्तर पूजित हो, भगवान् हृषीकेश इस विमानपर अदृश्य भावसे रहते हैं और आगे भी रहेंगे।

पृथ्वीने पूछा— मनुष्योंकी दृष्टिमें न आनेवाले भगवान् विष्णु किस प्रकार यहाँ उन्हें प्रत्यक्ष दिखायी देंगे?

भगवान् वराहने कहा— देवि! महर्षि अगस्त्यने इस पर्वतपर आकर सनातनदेव भगवान् विष्णुका दर्शन किया और बारह वर्षोंतक आराधना करके उन्हें बारंबार प्रसन्न किया। तत्पश्चात् भगवान्‌से यह याचना की कि 'प्रभो! आप सदा यहाँ निवास करें और सब लोगोंको आपका प्रत्यक्ष दर्शन होता रहे।'

उनके ऐसा कहनेपर श्री-भू देवियोंके साथ