भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,406 पृष्ठ

पृष्ठ 306, कुल 1406 में से

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पृष्ठ 306
  • वैष्णवखण्ड-भूमिवाराहखण्ड * २७७

और गदा लिये तथा आधा शरीर वृक्षपर टिकाये खड़े थे। उन्हें देखते ही वसुने तलवार छोड़ दी और भगवान्‌के चरणोंमें प्रणाम करके कहा— 'देवदेवेश्वर! आप यह क्या कर रहे हैं?'

श्रीभगवान् बोले—वसो! तुम मेरी बात सुनो। तुम्हारा पुत्र मुझमें भक्ति रखता है। यह तुमसे भी बढ़कर मुझे प्यारा है। इसलिये मैंने इसे प्रत्यक्ष दर्शन दिया। इसकी दृष्टिमें मैं सर्वत्र हूँ, किंतु तुम्हारी दृष्टिमें केवल स्वामिपुष्करिणीके तटपर रहता हूँ।

भगवान्‌का यह वचन सुनकर वसु बड़ा प्रसन्न हुआ। एक समय चन्द्रवंशमें तोण्डमान नामसे प्रसिद्ध एक राजा हुए। वे बड़े वीर थे। उनके पिताका नाम सुवीर और माताका नाम नन्दिनी था। पाँच ही वर्षकी अवस्थामें उनके हृदयमें भगवान् विष्णुकी भक्ति प्रकट हो गयी थी। वे बड़े बुद्धिमान् और शीलता, शूरता तथा पराक्रम आदि गुणोंकी निधि थे। युवा होनेपर उन्होंने पाण्ड्यनरेशकी सुन्दरी पुत्री पद्माके साथ विवाह किया। तत्पश्चात् भिन्न-भिन्न देशोंकी सैकड़ों स्वयंवरा कन्याओंको भी वे ब्याह लाये और नारायणपुरमें रहकर इस पृथ्वीपर देवराज इन्द्रकी भाँति सुख भोगने लगे। एक दिन सिंहके समान पराक्रमी तोण्डमान अपने पिताकी आज्ञा लेकर वेंकटाचलके समीप शिकार खेलनेके लिये गये। वहाँ अपने सेवकोंके साथ पैदल घूमते हुए उन्होंने एक यूथपति गजराजको देखा और उसे पकड़नेके लिये उसका पीछा किया। सुवर्णमुखरी नदीको पार करके वे परम उत्तम ब्रह्मर्षि शुकके पास गये और उन्हें प्रणाम करके, उनकी आज्ञा ले एक वनसे दूसरे वनमें चलते गये। एक जगह उन्होंने रेणुकादेवीको देखा, जो वल्मीक—बाँबी (बिमौट)—के आकारमें खड़ी थीं। उनको प्रणाम करके वीर तोण्डमान पश्चिमकी ओर चले गये। आगे जाकर उन्हें एक पँचरंगा तोता दिखायी दिया। फिर उसे पकड़नेके लिये वे भी उसके पीछे-पीछे दौड़ने लगे। तोता श्रीनिवासका नाम रटता हुआ शीघ्र ही पर्वतके शिखरपर जा पहुँचा। पीछा करते हुए राजा भी गिरिराजपर चढ़ गये और उस तोतेको ढूँढ़ते-ढूँढ़ते श्यामाक वनमें जा पहुँचे। वहाँ तोतेको न देखकर उन्होंने उस वनकी रक्षा करनेवाले निषादको देखा। उसने भी राजाको आते देख शीघ्रतापूर्वक आगे आकर उनकी अगवानी की और उन्हें प्रणाम करके विनीतभावसे वह दोनों हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। तोण्डमानने भी उसका आदर करके उससे पूछा—'वनेचर! इधर कोई पँचरंगा तोता आया है? क्या तुमने उसे देखा है? वह 'श्रीनिवास-श्रीनिवास' की रट लगा रहा था। बताओ वह किधर गया है?'

वनेचर बोला—महाराज! वह पाँच रंगोंवाला शुक भगवान् श्रीनिवासको बहुत प्रिय है। उसे श्रीदेवी और भूदेवीने पाल-पोसकर बड़ा किया है। वह सदा भगवान् श्रीहरिके ही पास रहता

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