भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 316
  • वैष्णवखण्ड-भूमिवाराहखण्ड * २८७

जाओ। वहाँ भक्तोंको अभय प्रदान करनेवाले शंख-चक्रधारी वनमालाविभूषित स्वर्णाचलनिवासी भगवान् श्रीनिवासका विधिपूर्वक दर्शन करके तुम सब पापोंसे मुक्त हो जाओगे।

यह सुनकर मुनिवर काश्यपने देव-दानववन्दित स्वामिपुष्करिणीमें नियमपूर्वक स्नान किया। इससे वे शुद्ध और स्वस्थ हो गये। फिर सब बन्धु-बान्धवोंने उनका विधिपूर्वक पूजन करके कहा—'आप निःसन्देह हमारे पूज्य हैं।' ब्राह्मणो! इस प्रकार मैंने आपलोगोंसे वेंकटाचलकी महिमाका वर्णन किया है। जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इसे सुनता है, वह विष्णुलोकमें प्रतिष्ठित होता है।

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स्वामितीर्थकी महिमा और उसमें स्नान करनेसे राजा धर्मगुप्तके शापजनित उन्मादका निवारण

ऋषि बोले—सूतजी! आप स्वामिपुष्करिणी तीर्थकी महिमाका पुनः वर्णन कीजिये।

सूतजीने कहा—जो लोग स्वामितीर्थमें स्नान करते हैं, वे तामिस्र, अन्धतामिस्र, महारौरव, रौरव, कुम्भीपाक, कालसूत्र, असिपत्रवन, कृमिभक्ष, अन्धकूप, सन्दंश, शाल्मलि, लालाभक्ष, अवीचि, सारमेयादन, वज्रकण्टक, क्षारकर्दमपातन, रक्षोगणान्न, शूलप्रोतनिरोधन, तिरोधान, सूचीमुख, पूयभक्ष, शोणितभक्ष और विषाग्निपरिपीडन आदि अट्ठाईस नरकोंमें नहीं जाते। जो दूसरोंके धन, सन्तान और स्त्रियोंका अपहरण करनेवाला है, वह बहुत वर्षोंतक तामिस्र नामक भयंकर नरकमें डाला जाता है। जो अधम मनुष्य माता-पिता और ब्राह्मणोंसे द्वेष रखता है, वह दस हजार योजन विस्तृत कालसूत्र नरकमें डाला जाता है। जो वेदमार्गका उल्लंघन करके कुपथपर चलता है, वह यमदूतोंद्वारा भयंकर असिपत्रवनमें गिराया जाता है। जो पकवान और दाल-शाक आदि अन्न पंक्तिभेद करके खाता है और मोहवश पंचयज्ञोंका अनुष्ठान किये बिना ही भोजन करता है, वह कृमिभोजन नरकमें डाला जाता है, जहाँ सैकड़ों कीड़े उसको खाते हैं और वह भी कीड़ोंको ही खाकर रहता है। जो स्नेह अथवा बलसे ब्राह्मणका धन हड़प लेता है तथा जो राजा या राजपुरुष दूसरोंके धनका अपहरण कर लेता है, वह सन्दंश नामक भयंकर नरकमें गिराया जाता है। जो नीच मानव अगम्या स्त्रीके साथ गमन करता है, अथवा जो नारी अगम्य पुरुषके साथ संगम करती है, वे दोनों क्रमशः लोहेकी तपायी हुई नारी-मूर्ति और पुरुष-मूर्तिको आलिंगन करके तबतक खड़े रहते हैं, जबतक चन्द्रमा और सूर्यकी सत्ता रहती है। तत्पश्चात् वे सूचीनामक घोर नरकमें डाले जाते हैं। जो मनुष्य अनेक प्रयत्नों और उपद्रवोंसे सब प्राणियोंको सताता है, वह बहुत काँटोंवाले भयंकर शाल्मलि नरकमें गिराया जाता है। जो राजा अथवा राजाका नौकर पाखण्डमतका अनुयायी होकर धार्मिक मर्यादाओंको तोड़ता है, वह वैतरणी नरकमें डाला जाता है। वृषलीसंगसे दूषित, शौचाचारहीन, अशास्त्रीय कर्मोंके करनेमें लज्जित न होनेवाले, वेदमार्गके त्यागी, सदा पशुका-सा आचरण करनेवाले व्यक्तियोंको यमकिंकर पूय, विष्ठा, मूत्र, कफ और पित्तादिसे पूर्ण अत्यन्त वीभत्स नरकमें गिराते हैं। जो कुत्तोंको अथवा जंगलमें वन्य मृगादि पशुओंको बाणोंके द्वारा पीड़ा पहुँचाता है, यमकिंकर उसको बाणोंके द्वारा बींधते हैं और पुनः प्राणरोध नामक नरकमें गिराते हैं। जो पाखण्डी यज्ञमें पशुओंकी हत्या