भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 320
  • वैष्णवखण्ड-भूमिवाराहखण्ड * २९१

है। जो मनुष्य उस दिन कृष्णतीर्थमें स्नान करता है, वह सब पापोंसे मुक्त होकर समस्त कामनाओंको प्राप्त कर लेता है। आजसे यह महातीर्थ तुम्हारे ही नामसे संसारमें प्रसिद्ध हो।' ऐसा कहकर भगवान् श्रीनिवास वहीं अन्तर्धान हो गये। उस तीर्थका ऐसा प्रभाव है कि वह बड़े-बड़े पापोंको शुद्ध करनेवाला है। मनुष्योंकी बुद्धिको शुद्ध करता और उन्हें सम्पूर्ण ऐश्वर्योंको देता है। ब्राह्मणो! इस प्रकार तुमलोगोंसे यह कृष्णतीर्थका माहात्म्य बतलाया गया, जो इसके श्रोता और वक्ता दोनोंको विष्णुलोक प्रदान करनेवाला है।

अब मैं भगवान् वेंकटेश्वरके वैभवका वर्णन करूँगा, जिसे सुनकर मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। जो मानव एक बार भगवान् वेंकटेश्वरका दर्शन कर लेता है, वह मोक्षको प्राप्त होता है। सत्ययुगमें जो पुण्य दस वर्षोंमें प्राप्त किया जाता है, वही त्रेतामें एक ही वर्षमें, द्वापरमें पाँच महीनोंमें और कलियुगमें एक ही दिनमें सिद्ध हो जाता है। परंतु जो भगवान् श्रीनिवासका दर्शन करते हैं, उन्हें एक-एक पलमें वही पुण्यफल कोटि-कोटि गुना होकर मिलता है। श्रीभगवान् वेंकटेश्वरमें सम्पूर्ण तीर्थ, सब देवता, मुनि और पितर विद्यमान हैं। भगवान् वेंकटेशका सच्चिदानन्दमय विग्रह श्रेष्ठ शंखसे पूजित है। उसके स्मरण करनेमात्रसे यमराजकी पीड़ा नहीं होती। जो इस पृथ्वीपर परम दुर्लभ मनुष्य-शरीर पाकर सर्वश्रेष्ठ देवता भगवान् वेंकटेशका दर्शन एवं पूजन करते हैं, उनका जन्म सफल है और वे ही कृतार्थ हैं। भगवान् नारायणका दर्शन होनेपर सहस्रों ब्रह्महत्या और दस हजार मद्यपानके पाप भी पूर्णतः नष्ट हो जाते हैं। जो मनुष्य सदा भोग और स्वर्गलोकका राज्य चाहते हैं, वे एक बार प्रसन्नतापूर्वक वेंकटाचलनिवासी भगवान् श्रीनिवासको प्रणाम करें। करोड़ों जन्मोंमें किये हुए जो कोई भी पाप हैं, वे सब भगवान् वेंकटेश्वरके दर्शनसे नष्ट हो जाते हैं। जो सम्पर्कसे, कौतूहलसे, लोभसे अथवा भयसे भी महादेव वेंकटाचलेश्वरका स्मरण करता है, वह इहलोक और परलोकमें कभी दुःखका भागी नहीं होता। वेंकटाचलवासी देवेश्वर भगवान् श्रीविष्णुका कीर्तन और पूजन करनेवाला अवश्य ही श्रीविष्णुका सारूप्य प्राप्त कर लेता है। जैसे प्रज्वलित अग्नि क्षणभरमें ढेर-के-ढेर ईंधन जलाकर भस्म कर देती है, वैसे ही भगवान् वेंकटेश्वरका दर्शन सब पापोंको दग्ध कर देता है।

भगवान् वेंकटेश्वरकी भक्ति आठ प्रकारकी मानी गयी है— १-भगवान्‌के भक्तोंके प्रति स्नेह-भाव, २-भगवद्भक्तोंकी पूजा करके उन्हें सन्तुष्ट करना, ३-स्वयं भक्तिपूर्वक भगवान्‌की पूजा करना, ४-अपने शरीरकी समस्त चेष्टाएँ भगवान्‌के लिये ही करना, ५-भगवान्‌के माहात्म्यकी कथामें रुचि रखना और उसे सुननेमें आदरका भाव होना, ६-अपने नेत्र और शरीरमें भगवद्भक्ति एवं भगवत्प्रेमजनित विकारका स्फुरण होना, ७-भगवान् श्रीनिवासका निरन्तर स्मरण करना तथा ८-वेंकटाचलनिवासी भगवान् श्रीनिवासकी शरण लेकर ही जीवन धारण करना। ऐसी आठ प्रकारकी भक्ति यदि किसी म्लेच्छमें भी हो तो वह निश्चय ही मोक्षको प्राप्त कर लेता है। भगवान्‌की अनन्य भक्ति तथा ब्रह्मज्ञानसे मोक्षकी प्राप्ति निश्चित है। संन्यासियों और नैष्ठिक ब्रह्मचारियोंको वेदान्तशास्त्र-श्रवणजनित ज्ञानसे जो मुक्ति प्राप्त होती है, वही सब लोगोंको केवल भगवान् वेंकटेश्वरके दर्शनसे अविलम्ब मिल जाती है। वेंकटगिरिके स्वामी भगवान् श्रीनिवासका दर्शन कर लेनेपर सब लोग महापुरुषकी श्रेणीमें चले आते हैं, उनमेंसे कोई एक-दूसरेसे कम या अधिक नहीं रह जाता। सब पातकोंका नाश करनेवाले परम पवित्र वेंकटाचलपर जाकर जो सर्वश्रेष्ठ देव भगवान्