भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,406 पृष्ठ

पृष्ठ 421, कुल 1406 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 421
३९२* संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

बदरिकाश्रम-माहात्म्य


## सब तीर्थोंका संक्षिप्त माहात्म्य तथा बदरीक्षेत्रकी विस्तृत महिमाका उपक्रम

**शौनकजी बोले—**समस्त धर्मज्ञोंमें श्रेष्ठ और सम्पूर्ण शास्त्रोंके तत्त्वज्ञ पुराणपरिनिष्ठित सूतजी ! सब धर्मोंसे रहित भयंकर कलियुग प्राप्त होनेपर मनुष्य दुष्कर्ममें प्रवृत्त हो सब धर्मोंका त्याग कर देते हैं, उनकी आयु बहुत थोड़ी होती है, उनकी प्राणशक्ति, बल, पराक्रम, तपस्या और कर्मानुष्ठान सब अत्यन्त क्षीण हो जाते हैं। वे सब अधर्मपरायण और वेदशास्त्रसे दूर होते हैं; तीर्थयात्रा, तपस्या, दान और भगवान् विष्णुकी भक्तिका उनमें अभाव-सा होता है। ऐसे क्षुद्र मनुष्योंका थोड़े प्रयाससे किस प्रकार उद्धार हो सकता है ?

**सूतजी बोले—**महाभाग शौनक ! तुम्हें साधुवाद है, तुम सदा दूसरोंके हितमें तत्पर रहते हो, भगवान् विष्णुकी भक्तिमें आसक्त होनेके कारण तुम्हारे मनका मल धुल गया है। संसारमें साधुपुरुषोंका संग दुर्लभ है। वह देहाभिमानी अजितात्मा पुरुषोंकी संचित पापराशिको हर लेता है और अधिक पुण्यके कारण उन्हें उत्तम गति प्रदान करता है। तीनों लोकोंके मनुष्योंके लिये सत्संग दुर्लभ है, वह कर्मपाशसे पीड़ित मनुष्योंकी हृदय-ग्रन्थि (आन्तरिक बन्धन)-को दूर करता है, बहुत कम बोलनेवाले और एकमात्र भगवान्‌का भजन करनेवाले लोगोंको उच्चपद प्रदान करता है और जन्म-मृत्युके चक्रसे थके हुए मानवोंको चिर-विश्रामकी प्राप्ति करानेका कारण होता है\*। शौनकजी ! यही प्रश्न पूर्वकालमें परम सुन्दर कैलाश-पर्वतके शिखरपर श्रोता ऋषियोंके समक्ष सत्पुरुषोंका कल्याण करनेके लिये स्वामिकार्तिकेयजीने भगवान् शंकरके आगे उपस्थित किया था।

**तब श्रीमहादेवजीने कहा—**षडानन ! परमार्थके पथपर चलनेवाले पुरुषोंको वैकुण्ठधामका निवास प्रदान करनेवाले बहुत-से तीर्थ और क्षेत्र हैं। कोई कामनाके अनुसार फल देनेवाले हैं और कोई मोक्षदायक हैं। गंगा, गोदावरी, नर्मदा, तपती, यमुना, क्षिप्रा, पुण्यमयी गौतमी, कौशिकी, कावेरी, ताम्रपर्णी, चन्द्रभागा, महेन्द्रजा, चित्रोत्पला, वेत्रवती, सरयू, चर्मण्वती, शतद्रु, पयस्विनी, गण्डकी, बाहुदा, सिन्धु और सरस्वती—ये सब पवित्र नदियाँ हैं और बार-बार सेवन करनेपर भोग तथा मोक्ष प्रदान करनेवाली हैं। अयोध्या, द्वारका, काशी, मथुरा, अवन्ती, कुरुक्षेत्र, रामतीर्थ, कांची, पुरुषोत्तमक्षेत्र, पुष्करक्षेत्र, दर्दुरक्षेत्र, वाराहक्षेत्र तथा बदरी नामक महापुण्यमय क्षेत्र, जो सब मनोरथोंका साधक है, ये सभी उत्तम तीर्थ हैं। मुक्तिकी एक साधन अयोध्यापुरीका विधिपूर्वक दर्शन करके मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो भगवान् विष्णुके धाममें जाते हैं। भाँति-भाँतिसे भगवान् विष्णुकी सेवापूर्वक पूजन, नृत्य और कीर्तन

---

\* हरति हृदयबन्धं कर्मपाशार्दितानां वितरति पदमुच्चैरल्पजल्पैकभाजाम्।  
जननमरणकर्मश्रान्तविश्रान्तिहेतुस्त्रिजगति मनुजानां दुर्लभः सत्प्रसंगः॥  
(स्क० पु० वै० बद० १। १२)