भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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२६* संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

इस प्रकार सम्मान दिये जानेपर मोहिनी देवीने परोसनेके लिये अमृतका कलश हाथमें उठा लिया और पहले देवताओंके समुदायको ही शीघ्रतापूर्वक अमृत देना आरम्भ किया। मोहिनी देवी अपने सुधा-सदृश हासरसामृतकी ही भाँति उस अमृत-रसको भी देवताओंके आगे बारंबार उँडेलने लगीं। उनके दिये हुए सुधारसको सम्पूर्ण देवताओं, देवेश्वरों, लोकपालों, गन्धर्वों, यक्षों और अप्सराओंने खूब छककर पीया। उस समय राहुनामक दैत्य अमृत पीनेके लिये देवताओंकी पंक्तिमें जा बैठा। उसने ज्यों ही अमृत पीनेकी इच्छा की, सूर्य और चन्द्रमाने अमिततेजस्वी भगवान् विष्णुको इसकी सूचना दे दी। तब भगवान्ने विकृत एवं विकराल शरीरवाले राहुका मस्तक काट डाला। उसका कटा हुआ मस्तक आकाशमें उड़ गया और धड़ पृथ्वीपर गिर पड़ा।

उस समय सौ करोड़ मुख्य-मुख्य दैत्य गर्जते तथा महान् बल-पराक्रमवाले देवताओंको युद्धके लिये ललकारते हुए आगे बढ़े। महाकाय राहु चन्द्रमाको अपना ग्रास बनाकर इन्द्रके पीछे दौड़ा। वह सम्पूर्ण देवताओंपर ग्रास लगाता जा रहा था। राहु यद्यपि एक ही था, तथापि वह सर्वत्र पहुँचा हुआ दिखायी देता था। यह देख देवता भयसे विह्वल हो चन्द्रमाको आगे करके बड़ी उतावलीके साथ भागे और पृथ्वी छोड़कर स्वर्गलोकमें चले गये। वे स्वर्गमें ज्यों ही पहुँचे, त्यों ही राहु भी महान् वेगसे उनके आगे आकर खड़ा हो गया। वह चन्द्रमाको निगल जाना चाहता था। यह देख चन्द्रमाने भयसे व्याकुल होकर भगवान् शंकरकी शरणमें जानेका विचार किया। वे मन-ही-मन शिवजीका स्मरण करके स्तुति करने लगे—‘देवेश! आप हमारे रक्षक हों, वृषभध्वज! मुझे संकटसे उबारें। शरणागतकी रक्षा करनेवाले श्रीपार्वतीपते! अपनी शरणमें आये हुए मेरी रक्षा करें।’

उनके इस प्रकार स्तुति करनेपर सबका कल्याण करनेवाले भगवान् सदाशिव वहीं प्रकट हो गये और चन्द्रमासे बोले—‘डरो मत।’ यों कहकर उन्होंने चन्द्रमाको अपने जटा-जूटके ऊपर रख लिया। तबसे चन्द्रमा उनके मस्तकपर श्वेत कमलपुष्पकी भाँति शोभा पा रहे हैं। चन्द्रमाकी रक्षा होनेके पश्चात् राहु भी वहाँ आ पहुँचा और भगवान् शिवकी स्तुति करने लगा—‘शान्तस्वरूप भगवान् शिवको नमस्कार है। आप ही ब्रह्म और परमात्मा हैं। आपको नमस्कार है। लिंगरूपधारी महादेव! जगत्पते! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। आप सम्पूर्ण भूतोंके निवासस्थान, दिव्य प्रकाशस्वरूप तथा सब भूतोंके पालक हैं। आपको नमस्कार है। महादेव! आप समस्त जगत्की आनन्दप्राप्तिके कारण हैं। आपको प्रणाम है। मेरा भक्ष्य चन्द्रमा इस समय आपके समीप आया है। उसे आप मुझे दे दीजिये।’

राहुकी इस प्रार्थनासे भगवान् सोमनाथ बहुत सन्तुष्ट हुए और उन्होंने राहुसे इस प्रकार कहा—‘मैं सम्पूर्ण भूतोंका आश्रय हूँ, देवता और असुर सबको मैं प्रिय हूँ।’ भगवान् शिवके यों कहनेपर राहु भी उन्हें प्रणाम करके उनके मस्तकमें स्थित हो गया। तब चन्द्रमाने भयके मारे अमृतका स्राव किया। उस अमृतके सम्पर्कसे राहुके अनेक सिर

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