संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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श्रीरघुनाथजीने उन्हें त्रयीविद्याके मुख्य-मुख्य विद्वानोंको सौंप दिया। श्रीरामचन्द्रजीका शासन वहाँ ताम्रपत्रपर लिखकर रख लिया गया है। जो उसको लोप करेगा, उसके पूर्वज नरकमें पड़ेंगे और आगे उसके कुलमें संतति नहीं होगी। तत्पश्चात् श्रीरामने पवनपुत्र हनुमान्जीको बुलाकर कहा—'महावीर वायुकुमार! तुम्हारी भी पूजा होगी। तुम इस क्षेत्रकी रक्षाके लिये यहाँ निवास करो।' हनुमान्जीने प्रणाम करके प्रभुकी आज्ञाको शिरोधार्य किया। इस प्रकार उस तीर्थका जीर्णोद्धार किया। श्रीमाताका पूजन करके वे अन्य तीर्थोंमें जानेको उद्यत हुए। ब्रह्मा आदि देवता भी श्रीरामको आशीर्वाद दे अपने-अपने लोकको चले गये।
रामनामकी महिमा, कलियुगका प्रभाव तथा धर्मारण्यक्षेत्रके माहात्म्यश्रवणका फल
व्यासजी कहते हैं—जो लोग 'राम-राम-राम' इस मन्त्रका उच्चारण करते हैं, खाते, पीते, सोते, चलते और बैठते समय सुखमें या दुःखमें राममन्त्रका जप करते हैं, उन्हें दुःख, दुर्भाग्य, आधि-व्याधिका भय नहीं रहता। उनकी आयु, सम्पत्ति और बल प्रतिदिन बढ़ते रहते हैं। रामका नाम लेनेसे मनुष्य भयंकर पापसे छूट जाता है। वह नरकमें नहीं पड़ता और अक्षयगतिको प्राप्त होता है।
इस प्रकार श्रीरामजीने तीर्थोद्धारका सब कार्य पूरा कर ब्राह्मणोंकी परिक्रमा करके उन्हें प्रणाम किया और गाय, घोड़े, भैंस तथा रथ आदि बहुत-से दान देकर वे सेनासहित लौट आये। क्रमशः अयोध्या नगरीमें आकर उन्होंने दीर्घकालतक राज्य किया।
युधिष्ठिरने पूछा—मुने! कलियुग प्राप्त होनेपर संसारमें कैसा भय होता है?
व्यासजी बोले—राजन्! कलियुगमें लोग असत्यवादी और साधुपुरुषोंकी निन्दा करनेवाले होंगे। वे सभी लुटेरोंके कर्म करनेवाले तथा पितृभक्तिसे दूर होंगे। अपने ही गोत्रकी स्त्रियोंसे रमण करनेवाले और चपलताके ही चिन्तनमें तत्पर होंगे। सब एक-दूसरेके विरोधी, ब्राह्मणद्वेषी तथा शरणागतोंका वध करनेवाले होंगे। कलियुग प्राप्त होनेपर ब्राह्मण वेदभ्रष्ट, अहंकारी, वैश्योचित आचार (कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य)-में तत्पर और सन्ध्याकर्मका लोप करनेवाले होंगे। शान्तिकालमें शूरताकी डींग मारनेवाले और भय प्राप्त होनेपर अत्यन्त दीन होंगे। श्राद्ध और तर्पणसे दूर रहेंगे। असुरोंके समान आचारवाले तथा विष्णुभक्तिसे रहित होंगे। दूसरोंके धन हड़पनेकी इच्छावाले और सूदखोर होंगे। ब्राह्मण बिना नहाये भोजन कर लेंगे। क्षत्रिय युद्धका नाम सुनकर दूर भागेंगे। कलिमें सब लोग दुष्टवृत्तिवाले तथा मलिन होंगे। मदिरा पीयेंगे और जो यज्ञके अधिकारी नहीं हैं, ऐसे लोगोंसे भी यज्ञ करावेंगे। स्त्रियाँ पतिसे द्वेष करनेवाली तथा पुत्र पितासे वैर रखनेवाले होंगे। कलियुगके क्षुद्र मनुष्य भाईसे शत्रुता रखेंगे। ब्राह्मण धनसंग्रहमें तत्पर होकर गायका दूध, दही और घी बेचेंगे। कलिकालमें गौएँ प्रायः दूध नहीं देती हैं, वृक्षोंमें कभी फल नहीं लगते हैं। लोग कन्या बेचनेवाले होंगे। गाय और बकरीको भी बेचेंगे। विष-विक्रय तथा रस-विक्रय करेंगे। कलियुगके ब्राह्मण वेद बेचनेवाले होंगे। स्त्रियाँ ग्यारह वर्षकी आयुमें