भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,406 पृष्ठ

पृष्ठ 803, कुल 1406 में से

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७७४* संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

विषय नहीं है, ऐसी, २९ अनघा—निष्पाप, ३० अद्भुतरूपा—आश्चर्यमय स्वरूपवाली, ३१ अघहारिणी—अपने कीर्तन, दर्शन, स्पर्श और जलस्नानसे सबके पापोंको हर लेनेवाली, ३२ अद्रिराजसुता—गिरिराज हिमालयकी पुत्री, ३३ अष्टाङ्गयोगसिद्धिप्रदा—अष्टांगयोगसे प्राप्त होनेवाली सिद्धि (मुक्ति)-को देनेवाली, ३४ अच्युता—अपनी महिमासे कभी च्युत न होनेवाली अथवा विष्णुरूपा।^१

३५ अक्षुण्णशक्तिः—जिसकी शक्ति कभी खण्डित या कुण्ठित नहीं होती, वह, ३६ असुदा—अपने जीवनरूपी जलसे प्राणदान करनेवाली, ३७ अनन्ततीर्था—सर्वतीर्थमयी होनेके कारण असंख्य तीर्थोंसे युक्त, ३८ अमृतोदका—अमृतके समान मधुर अथवा मोक्षदायक जलवाली, ३९ अनन्त-महिमा—जिसकी महिमाका कहीं अन्त नहीं है, ऐसी, ४० अपारा—सीमारहित, ४१ अनन्तसौख्य-प्रदा—मोक्ष या भगवत्प्राप्तिका अक्षय सुख प्रदान करनेवाली, ४२ अन्नदा—भोग प्रदान करनेवाली।^२

४३ अशेषदेवतामूर्तिः—सम्पूर्ण देवस्वरूपा, ४४ अघोरा—शान्तस्वरूपा, ४५ अमृतरूपिणी—मोक्षस्वरूपा, ४६ अविद्याजालशमनी—अविद्यारूपी आवरणका नाश करनेवाली, ४७ अप्रतर्क्यगति-प्रदा—जहाँ मन और वाणीकी पहुँच नहीं है, ऐसी मोक्षरूप गति प्रदान करनेवाली।^३

४८ अशेषविघ्नसंहर्त्री—समस्त विघ्नोंका संहार करनेवाली, ४९ अशेषगुणगुम्फिता—सम्पूर्ण सद्गुणोंसे ग्रथित, ५० अज्ञानतिमिरज्योतिः—अज्ञानमय अन्धकारका नाश करनेवाली ज्योतिः-स्वरूपा, ५१ अनुग्रहपरायणा—भक्तोंपर अनुग्रह करनेमें तत्पर।^४

५२ अभिरामा—सब ओरसे मनोरम, ५३ अनवद्याङ्गी—निर्दोष स्वरूपवाली, ५४ अनन्त-सारा—जिसके सार अर्थात् शक्तिका अन्त नहीं है, ऐसी, ५५ अकलङ्किनी—कलंकसे रहित, ५६ आरोग्यदा—अपने अमृतमय जलसे आरोग्य प्रदान करनेवाली, ५७ आनन्दवल्ली—दिव्य आनन्दकी प्राप्ति करानेवाली कल्पलताके समान, ५८ आपन्नार्तिविनाशिनी—शरणमें आये हुए जीवोंकी पीड़ा (संसार-बन्धन)-का नाश करनेवाली।^५

५९ आश्चर्यमूर्तिः—आश्चर्यमय स्वरूपवाली, ६० आयुुष्या—आयु प्रदान करनेवाली, ६१ आढ्या—दिव्य वैभवसे सम्पन्न, ६२ आद्या—सबकी कारणभूता आदिशक्ति, ६३ आप्रा—सब ओरसे परिपूर्ण, ६४ आर्यसेविता—श्रेष्ठ पुरुषों (देवता और ऋषि आदि)-के द्वारा सेवित, ६५ आप्यायिनी—सबको तृप्त करनेवाली, ६६ आप्तविद्या—ब्रह्मविद्यास्वरूपा अथवा सम्पूर्ण विद्याओंको जाननेवाली, ६७ आख्या—सदा और सर्वत्र प्रसिद्ध, ६८ आनन्दा—सुखस्वरूपा, ६९ आश्वासनदायिनी—नरक आदिके भयसे डरे हुए प्राणियोंको सान्त्वना प्रदान करनेवाली।^६

७० आलस्यघ्नी—आलस्यका नाश करनेवाली, ७१ आपदां हन्त्री—आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक आपत्तियोंका नाश करनेवाली, ७२ आनन्दामृतवर्षिणी—ब्रह्मानन्दमय अमृतकी वर्षा करनेवाली, ७३ इरावती—इरावती नामवाली नदी अथवा इरा अर्थात् लक्ष्मीसे युक्त, ७४ इष्टदात्री—भक्तोंको अभीष्ट वस्तु देनेवाली, ७५ इष्टा—आराध्यदेवी अथवा सबके द्वारा पूजित, ७६ इष्टापूर्तफलप्रदा—इष्ट—यज्ञ, होम आदि और आपूर्त—कूप, तड़ाग, वापीनिर्माण आदि, इन सबके पुण्यफलको देनेवाली।^७

७७ इतिहासश्रुतीड्यार्था—इतिहास और वेद दोनोंके द्वारा जिसके पुरुषार्थकी स्तुति की जाती


१. अचिन्त्यशक्तिरनघाद्भुतरूपाघहारिणी । अद्रिराजसुताष्टाङ्गयोगसिद्धिप्रदाच्युता ॥
२. अक्षुण्णशक्तिरसुदानन्ततीर्थामृतोदका । अनन्तमहिमापारानन्तसौख्यप्रदानदा ॥
३. अशेषदेवतामूर्तिरघोराऽमृतरूपिणी । अविद्याजालशमनी ह्यप्रतर्क्यगतिप्रदा ॥
४. अशेषविघ्नसंहर्त्री त्वशेषगुणगुम्फिता । अज्ञानतिमिरज्योतिस्त्वनुग्रहपरायणा ॥
५. अभिरामानवद्याङ्ग्यनन्तसाराकलङ्किनी । आरोग्यदाऽऽनन्दवल्ली त्वापन्नार्तिविनाशिनी ॥
६. आश्चर्यमूर्तिरायुष्या ह्याढ्याऽऽद्याऽऽप्राऽऽर्यसेविता । आप्यायिन्याप्तविद्याऽऽख्या त्वानन्दाऽऽश्वासदायिनी ॥
७. आलस्यघ्न्यापदां हन्त्री ह्यानन्दामृतवर्षिणी । इरावतीष्टदात्रीष्टा त्विष्टापूर्तफलप्रदा ॥

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