भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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७७६ * संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

आश्रय लेनेवाली बुद्धिसस्वरूपा, १२२ ऋद्धि-दात्री—समृद्धि देनेवाली, १२३ ऋक्स्वरूपा—ऋग्वेदस्वरूपिणी, १२४ ऋजुप्रिया—सरल स्वभाववाले साधु महात्माओंको प्रिय लगनेवाली, १२५ ऋक्ष-मार्गवहा—नक्षत्रलोकके मार्गसे बहनेवाली, १२६ ऋक्षाचि:—ताराओंके सदृश उज्ज्वल कान्तिवाली, १२७ ऋजुमार्गप्रदर्शिनी—धर्म एवं मोक्षका सरल मार्ग दिखानेवाली।^१

१२८ एधिताखिलधर्मार्था—सम्पूर्ण धर्म और अर्थको बढ़ानेवाली, १२९ एका—अपने ढंगकी अकेली, १३० एकामृतदायिनी—एकमात्र अमृत-स्वरूप ब्रह्मकी प्राप्ति करानेवाली, १३१ एधनीय-स्वभावा—जिसके दया, उदारता आदि स्वाभाविक गुण निरन्तर बढ़ने योग्य हों, ऐसी १३२ एज्या—पूजनीया, १३३ एजिताशेषपातका—सम्पूर्ण पातकोंको कम्पित करनेवाली।^२

१३४ ऐश्वर्यदा—अणिमा, महिमा आदि ऐश्वर्य प्रदान करनेवाली, १३५ ऐश्वर्यरूपा—भगवद्विभूतिस्वरूपा, १३६ ऐतिह्यम्—इतिहास-स्वरूपा, १३७ ऐन्दवीद्युति:—चन्द्रमाकी कान्तिरूपा, १३८ ओजस्विनी—शक्तिमती, १३९ ओषधी-क्षेत्रम्—अन्न पैदा करनेका क्षेत्र, १४० ओजोदा—बल एवं तेज प्रदान करनेवाली, १४१ ओदन-दायिनी—धानकी पैदावार बढ़ाकर भात देनेवाली, अथवा अन्नदायिनी अन्नपूर्णारूपा।^३

१४२ ओष्ठामृता—जिसका जल ओष्ठके भीतर आनेपर अमृतके समान प्रतीत होता है अथवा जिसके ओष्ठमें अमृत हो, वह, १४३ औन्नत्यदात्री—आध्यात्मिक, लौकिक एवं पारलौकिक उन्नति प्रदान करनेवाली, १४४ भवरोगिणाम् औषधम्—संसार-रोगसे ग्रस्त प्राणियोंके लिये ओषधिरूपा, १४५ औदार्यचञ्चुरा—उदारतामें कुशल, १४६ औपेन्द्री—उपेन्द्र अर्थात् वामनरूपधारी विष्णुकी पत्नी लक्ष्मीस्वरूपा अथवा विष्णुकी चरणोदकस्वरूपा, १४७ औग्री—रुद्रकी शक्ति, १४८ औमेयरूपिणी—उमाके सदृश रूपवाली।^४

१४९ अम्बराध्ववहा—आकाशमार्गपर बहने-वाली, १५० अम्बष्ठा—अ अर्थात् विष्णुकी शरण लेनेवाले वैष्णवोंको अम्ब कहते हैं; उनमें स्थित होनेवाली, १५१ अम्बरमाला—आकाशमें पुष्पहारके समान शोभा पानेवाली, १५२ अम्बुजे-क्षणा—कमलरूप अथवा कमल-सदृश नेत्रोंवाली, १५३ अम्बिका—जगदम्बास्वरूपा, १५४ अम्बु-महायोनि:—जलकी उत्पत्तिका मूल कारण, १५५ अन्धोदा—अन्न देनेवाली, १५६ अन्धकहारिणी—अन्धकासुरका नाश करनेवाले शिवकी शक्ति अथवा अज्ञानान्धकारका नाश करनेवाली।^५

१५७ अंशुमाला—तेजका समुदाय, १५८ अंशु-मती—तेजोमयी, १५९ अङ्गीकृतषडानना—छः मुखोंवाले स्कन्दको पुत्ररूपमें स्वीकार करनेवाली, १६० अन्धतामिस्रहन्त्री—अन्धतामिस्र आदि नरकोंका निवारण करनेवाली, १६१ अन्धु:—कूपमात्रमें स्वयं प्रकट होनेवाली, १६२ अञ्जना—आध्यात्मिक दृष्टिको शुद्ध करनेके लिये दिव्य अंजनरूपा अथवा हनुमान्जीको जन्म देनेवाली अंजनास्वरूपा, १६३ अञ्जनावती—ईशानकोणकी रक्षा करनेवाली हस्तिनी, अंजनावतीसे अभिन्न।^६

१६४ कल्याणकारिणी—सबका कल्याण करनेवाली, १६५ काम्या—कमनीया, १६६ कमलो-त्पलगन्धिनी—कमल और उत्पलकी सुगन्धसे सुवासित, १६७ कुमुद्वती—कुमुद पुष्पोंसे युक्त, १६८ कमलिनी—कमल पुष्पोंसे अलंकृत, १६९ कान्ति:—दीप्तिमयी, १७० कल्पित-दायिनी—मनोवांछित वस्तु देनेवाली।^७


१. ऋतम्भरर्द्धिदात्री च ऋक्स्वरूपा ऋजुप्रिया । ऋक्षमार्गवहर्क्षाचिर्ऋजुमार्गप्रदर्शिनी ॥
२. एधिताखिलधर्मार्था त्वैकेकामृतदायिनी । एधनीयस्वभावैज्या त्वेजिताशेषपातका ॥
३. ऐश्वर्यदैश्वर्यरूपा हौतिह्यं ह्रैन्दवीद्युतिः । ओजस्विन्तोषधीक्षेत्रमोजोदौदनदायिनी ॥
४. ओष्ठामृतौन्नत्यदात्री त्वौषधं भवरोगिणाम् । औदार्यचञ्चुरौपेन्द्री त्वौग्री ह्यौमेयरूपिणी ॥
५. अम्बराध्ववहाम्बष्ठाम्बरमालाम्बुजेक्षणा । अम्बिकाम्बुमहायोनिरन्धोदान्धकहारिणी ॥
६. अंशुमाला ह्यंशुमती त्वङ्गीकृतषडानना । अन्धतामिस्रहन्त्र्यन्धुरञ्जना ह्यञ्जनावती ॥
७. कल्याणकारिणी काम्या कमलोत्पलगन्धिनी । कुमुद्वती कमलिनी कान्तिः कल्पितदायिनी ॥