संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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२१८ खण्डितप्रणताघौघा—शरणागतोंकी पापराशिका खण्डन करनेवाली, २१९ खलबुद्धि-विनाशिनी—खलोंकी बुद्धि अथवा खलतापूर्ण बुद्धिका विनाश करनेवाली, २२० खातैनःकन्द-सन्दोहा—पापरूपी कन्दसमुदायको उखाड़ फेंकनेवाली, २२१ खड्गखट्वाङ्गखेटिनी—खड्ग (तलवार), खट्वांग (खाटके पायेके आकारवाले शस्त्र) और खेट धारण करनेवाली।^१
२२२ खरसन्तापशमनी—तीखे तापको शान्त करनेवाली, २२३ पीयूषपाथासां खनिः—अमृतके समान मधुर जलकी खान, २२४ गङ्गा—‘स्वर्गाद् गां गतवतीति गंगा’—स्वर्गसे भूतलपर गमन करनेके कारण गंगा नामसे प्रसिद्ध, अथवा कलकल गान करनेवाली या ब्रह्मद्रवरूपा सच्चिदानन्दमयी देवी, २२५ गन्धवती—पृथ्वीस्वरूपा अथवा उत्तम गन्धसे युक्त, २२६ गौरी—गौर वर्णवाली अथवा पार्वतीस्वरूपा, २२७ गन्धर्वनगरप्रिया—गन्धर्व-नगरके निवासियोंको प्रिय लगनेवाली।^२
२२८ गम्भीराङ्गी—गहराईसे युक्त अथवा गहनस्वरूपवाली, २२९ गुणमयी—त्रिगुणात्मिका प्रकृतिरूपा अथवा सर्वज्ञता आदि गुणोंसे युक्त, २३० गतातङ्का—भयरहित अथवा अपने पास आनेवालोंके संसार-भयको निवृत्त करनेवाली, २३१ गतिप्रिया—निरन्तर गमन जिसे प्रिय है अथवा जो गति अर्थात् ज्ञानको प्रिय मानती है, ऐसी, २३२ गणनाथाम्बिका—गणेशजीकी माता, २३३ गीता—भगवद्गीतास्वरूपा, २३४ गद्यपद्य-परिष्कृता—गद्य-पद्यमय स्तोत्रोंसे जिसकी स्तुति की जाती है, वह।^३
२३५ गान्धारी—पृथ्वीको धारण करनेवाली वाराहशक्तिस्वरूपा, अथवा धृतराष्ट्रपत्नीस्वरूपा, २३६ गर्भशमनी—मुक्ति प्रदान करके गर्भवासके कष्टको दूर करनेवाली, २३७ गतिभ्रष्टगतिप्रदा—गतिभ्रष्टों—पतितोंको भी सद्गति प्रदान करनेवाली, २३८ गोमती—द्वारका अथवा नैमिषारण्यमें स्थित गोमतीनदीस्वरूपा, २३९ गुह्यविद्या—ब्रह्मविद्या, २४० गौः—पृथ्वीस्वरूपा अथवा कामधेनुरूपिणी, २४१ गोप्त्री—सद्गति प्रदान करके सबकी रक्षा करनेवाली, २४२ गगनगामिनी—आकाशगामिनी।^४
२४३ गोत्रप्रवर्द्धिनी—पर्वतोंसे निर्झर आदिका जल पाकर बढ़नेवाली अथवा अपने भक्तोंका गोत्र (वंश) बढ़ानेवाली, २४४ गुण्या—उत्तम गुणोंसे युक्त, २४५ गुणातीता—तीनों गुणोंसे परे, २४६ गुणाग्रणीः—सद्गुणोंके कारण अग्रगण्य, २४७ गुहाम्बिका—स्कन्दकी माता, २४८ गिरि-सुता—हिमवान्की पुत्री, २४९ गोविन्दाङ्घ्रि-समुद्भवा—श्रीविष्णुके चरणोंसे प्रकट हुई।^५
२५० गुणनीयचरित्रा—गुणन—प्रशंसा या गणना करनेयोग्य उत्तम चरित्रवाली, २५१ गायत्री—अपना गुणगान करनेवालेकी रक्षा करनेवाली अथवा गायत्रीदेवीस्वरूपा, २५२ गिरिशप्रिया—भगवान् शिवकी वल्लभा, २५३ गूढरूपा—छिपे हुए दिव्य स्वरूपवाली, २५४ गुणवती—शान्ति आदि उत्तम गुणोंसे युक्त, २५५ गुर्वी—गौरवमयी, २५६ गौरववर्द्धिनी—महत्त्व बढ़ानेवाली अथवा स्वयं ही गौरवसे बढ़नेवाली।^६
२५७ ग्रहपीडाहरा—अनिष्ट स्थानोंमें स्थित ग्रहोंकी पीड़ा दूर करनेवाली, २५८ गुन्द्रा—'गु' अर्थात् अविद्याका द्रावण—नाश करनेवाली, २५९ गरघ्नी—विषका प्रभाव दूर करनेवाली,
१. खण्डितप्रणताघौघा खलबुद्धिविनाशिनी। खातैःकन्दसन्दोहा खड्गखट्वाङ्गखेटिनी ॥
२. खरसन्तापशमनी खनिः पीयूषपाथसाम्। गंगा गन्धवती गौरी गन्धर्वनगरप्रिया ॥
३. गम्भीराङ्गी गुणमयी गतातङ्का गतिप्रिया। गणनाथाम्बिका गीता गद्यपद्यपरिष्कृता ॥
४. गान्धारी गर्भशमनी गतिभ्रष्टगतिप्रदा। गोमती गुह्यविद्या गौर्गोप्त्री गगनगामिनी ॥
५. गोत्रप्रवर्द्धिनी गुण्या गुणातीता गुणाग्रणीः। गुहाम्बिका गिरिसुता गोविन्दाङ्घ्रिसमुद्भवा ॥
६. गुणनीयचरित्रा च गायत्री गिरिशप्रिया। गूढरूपा गुणवती गुर्वी गौरववर्द्धिनी ॥