भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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७८४* संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

जिसका, ऐसी, ४८३ धर्मधुरा—धर्मका आधार अथवा उत्कृष्ट धर्मस्वरूपा, ४८४ धेनुः—कामधेनुस्वरूपा, ४८५ धीरा—धैर्यशालिनी अथवा विदुषी, ४८६ धृतिः—धारणाशक्ति, ४८७ ध्रुवा—नित्या, ४८८ धेनुदानफलस्पर्शा—जिसके जलका स्पर्श गोदानका फल देनेवाला है, वह, ४८९ धर्म-कामार्थ मोक्षदा—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थोंको देनेवाली।^१

४९० धर्मोर्मिवाहिनी—धर्मरूपी लहरोंको धारण करनेवाली, ४९१ धुर्या—श्रेष्ठा, ४९२ धात्री—धारण-पोषण करनेवाली अथवा माता, ४९३ धात्री-विभूषणम्—पृथ्वीका अलंकार, ४९४ धर्मिणी—पुण्यवती, ४९५ धर्मशीला—स्वभावतः धर्मका आचरण करनेवाली, ४९६ धन्विकोटिकृतावना—कोटि-कोटि धनुर्धर वीरोंने जिसका रक्षण किया है, वह।^२

४९७ ध्यातृपापहरा—ध्यान करनेवाले पुरुषके सब पापोंको हर लेनेवाली, ४९८ ध्येया—ध्यान करनेयोग्य, ४९९ धावनी—धोनेवाली, पवित्र करनेवाली, ५०० धूतकल्मषा—पापोंको धो डालनेवाली, ५०१ धर्मधारा—धर्मको धारण करनेवाली, ५०२ धर्मसारा—सब धर्मोंकी सारभूता, ५०३ धनदा—धन देनेवाली, ५०४ धनवर्द्धिनी—धन बढ़ानेवाली।^३

५०५ धर्माधर्मगुणच्छेत्री—धर्माधर्मके बन्धनको काटनेवाली ब्रह्मविद्यास्वरूपा, ५०६ धत्तूरकुसुम-प्रिया—धतूरके फूलमें रुचि रखनेवाली, ५०७ धर्मेशी—धर्मकी स्वामिनी, ५०८ धर्म-शास्त्रज्ञा—धर्मशास्त्रको जाननेवाली, ५०९ धन-धान्यसमृद्धिकृत्—धन और धान्यको बढ़ानेवाली।^४

५१० धर्मलभ्या—धर्मसे प्राप्त होने योग्य, ५११ धर्मजला—धर्मस्वरूप जलवाली, ५१२ धर्म-प्रसवधर्मिणी—धर्मकी जननी तथा धर्मनिष्ठ, ५१३ ध्यानगम्यस्वरूपा—जिसका स्वरूप ध्यानके द्वारा चिन्तन करने योग्य है, वह, ५१४ धरणी—धारण करनेवाली, पृथ्वीरूपा, ५१५ धातृपूजिता—ब्रह्माजीके द्वारा पूजित।^५

५१६ धूः—पापोंको कम्पित करनेवाली, ५१७ धूर्जटिजटासंस्था—भगवान् शंकरकी जटामें वास करनेवाली, ५१८ धन्या—कृतार्थस्वरूपा, ५१९ धीः—बुद्धिस्वरूपा, ५२० धारणावती—धारणाशक्तिसे सम्पन्न, मेधास्वरूपा, ५२१ नन्दा—नन्दा नामवाली गंगा अथवा जगत्‌को आनन्द देनेवाली, ५२२ निर्वाणजननी—परम शान्ति अथवा मोक्ष देनेवाली, २३ नन्दिनी—दूसरोंको प्रसन्न करनेवाली अथवा वसिष्ठकी धेनु, ५२४ नुन्नपातका—पातकोंको दूर करनेवाली।^६

५२५ निषिद्धविघ्ननिचया—विघ्नसमुदायका निवारण करनेवाली, ५२६ निजानन्दप्रकाशिनी—अपने स्वरूपभूत आनन्दको प्रकाशित करनेवाली, ५२७ नभोऽङ्गणचरी—आकाशके आँगनमें विचरने-वाली, ५२८ नूतिः—स्तुतिस्वरूपा, ५२९ नम्या—वन्दनीया, ५३० नारायणी—नारायणशक्तिस्वरूपा अथवा नारायणी (गण्डकी) नदीस्वरूपा, ५३१ नुता—ब्रह्मा और इन्द्र आदि देवताओंके द्वारा अभिनन्दिता।^७

५३२ निर्मला—संसाररूपी मलसे रहित, ५३३ निर्मलाख्याना—जिसकी माहात्म्यकथा अत्यन्त निर्मल है, ऐसी, ५३४ नाशिनी ताप-सम्पदाम्—सन्तापकी परम्पराका नाश करनेवाली,


१. धर्मद्रवा धर्मधुरा धेनुर्धीरा धृतिर्ध्रुवा । धेनुदानफलस्पर्शा धर्मकामार्थमोक्षदा ॥
२. धर्मोर्मिवाहिनी धुर्या धात्री धात्रीविभूषणम् । धर्मिणी धर्मशीला च धन्विकोटिकृतावना ॥
३. ध्यातृपापहरा ध्येया धावनी धूतकल्मषा । धर्मधारा धर्मसारा धनदा धनवर्द्धिनी ॥
४. धर्माधर्मगुणच्छेत्री धत्तूरकुसुमप्रिया । धर्मेशी धर्मशास्त्रज्ञा धनधान्यसमृद्धिकृत् ॥
५. धर्मलभ्या धर्मजला धर्मप्रसवधर्मिणी । ध्यानगम्यस्वरूपा च धरणी धातृपूजिता ॥
६. धूर्धूर्जटिजटासंस्था धन्या धीर्धारणावती । नन्दा निर्वाणजननी नन्दिनी नुन्नपातका ॥
७. निषिद्धविघ्ननिचया निजानन्दप्रकाशिनी । नभोऽङ्गणचरी नूतिर्नम्या नारायणी नुता ॥