भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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७८८* संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

६८९ ब्रह्मोशविष्णुरूपा—ब्रह्मा, शिव और विष्णुस्वरूपा, ६९० बुद्धिः—बुद्धिस्वरूपा, ६९१ विभववर्द्धिनी—धन बढ़ानेवाली, ६९२ विलासिसुखदा—विलासियोंको सुख देनेवाली, ६९३ वश्या—भगवदिच्छाके अधीन रहनेवाली, ६९४ व्यापिनी—सर्वत्र व्यापक, ६९५ वृषारणिः—धर्मोत्पत्तिकी कारणरूपा।^१

६९६ वृषाङ्कमौलिनिलया—भगवान् शंकरके मस्तकपर निवास करनेवाली, ६९७ विपन्नार्त्ति-प्रभञ्जनी—विपत्तिमें पड़े हुए भक्तजनोंकी पीड़ा अथवा अपने जलमें मृत्युको प्राप्त हुए पुरुषोंकी दुर्गति एवं कष्टका निवारण करनेवाली, ६९८ विनीता—विनयशीला, ६९९ विनता—विशेषतः नम्र, ७०० ब्रध्नतनया—सूर्यपुत्री यमुना-स्वरूपा, ७०१ विनयान्विता—विनययुक्त।^२

७०२ विपञ्ची—वीणास्वरूपा अथवा वीणाकी-सी मधुर ध्वनि करनेवाली, ७०३ वाद्यकुशला—सभी प्रकारके वाद्योंको बजानेमें चतुर, ७०४ वेणुश्रुतिविचक्षणा—वेणुगीत सुनने और समझनेमें कुशल, ७०५ वर्चस्करी—तेज उत्पन्न करनेवाली, ७०६ बलकरी—सामर्थ्य प्रदान करनेवाली, ७०७ बलोन्मूलितकल्मषा—बलपूर्वक पापोंका उच्छेद करनेवाली।^३

७०८ विपाप्मा—पापरहित, ७०९ विग-तातङ्का—भयरहित, ७१० विकल्पपरिवर्जिता—भेददृष्टिसे रहित, ७११ वृष्टिकर्त्री—सूर्यरूपसे वर्षा करनेवाली, ७१२ वृष्टिर्जला—वर्षाके कारणभूत जलवाली, ७१३ विधिः—ब्रह्मारूपसे सृष्टि करनेवाली, ७१४ विच्छिन्नबन्धना—अपने आश्रितोंके संसार-बन्धनका नाश करनेवाली।^४

७१५ व्रतरूपा—कृच्छ्र-चान्द्रायणादि व्रत-स्वरूपा अथवा भक्तोंके व्रत (संकल्प)-के अनुसार स्वरूप धारण करनेवाली, ७१६ वित्तरूपा—वैभवरूपिणी, ७१७ बहुविघ्नविनाशकृत्—बहुतसे विघ्नोंका विनाश करनेवाली, ७१८ वसुधारा—वसु (धन) धारण करनेवाली, आठ वसुओंको मातारूपसे गर्भमें धारण करनेवाली अथवा 'वसुधारा' स्वरूपा, ७१९ वसुमती—रत्नगर्भा वसुधारूपा, ७२० विचित्राङ्गी—अद्भुत शरीरवाली, ७२१ विभावसुः—अग्नि अथवा सूर्यकी भाँति प्रकाशित होनेवाली।^५

७२२ विजया—विजयशालिनी, ७२३ विश्व-बीजम्—जगत्की कारणस्वरूपा, ७२४ वामदेवी—वामदेव शिवकी शक्ति, मनोहारिणी देवी, ७२५ वरप्रदा—वर देनेवाली, ७२६ वृषाश्रिता—धर्मके आश्रित, ७२७ विषघ्नी—विषका प्रभाव नष्ट करनेवाली, ७२८ विज्ञानोर्म्यंशुमालिनी—विज्ञानमयी तरंगों और किरणोंसे युक्त।^६

७२९ भव्या—कल्याणमयी, ७३० भोगवती—भोगवती नामसे प्रसिद्ध पातालगंगा, ७३१ भद्रा—मंगलमयी, ७३२ भवानी—शिवपत्नी, ७३३ भूत-भाविनी—समस्त प्राणियोंकी उत्पत्ति और पालन करनेवाली, ७३४ भूतधात्री—चार प्रकारके जीवोंका धारण-पोषण करनेवाली, ७३५ भयहरा—संसार-भयका निवारण करनेवाली, ७३६ भक्तदारिद्र्य-घातिनी—भक्तोंकी दरिद्रताका नाश करनेवाली।^७

७३७ भुक्तिमुक्तिप्रदा—भोग और मोक्ष देनेवाली, ७३८ भेशी—नक्षत्रोंकी अधीश्वरी, ७३९ भक्त-स्वर्गापवर्गदा—भक्तोंको स्वर्ग और मोक्ष देनेवाली, ७४० भागीरथी—राजा भगीरथके द्वारा लायी


१. ब्रह्मोशविष्णुरूपा च बुद्धिर्विभववर्द्धिनी। विलासिसुखदा वश्या व्यापिनी च वृषारणिः॥
२. वृषाङ्कमौलिनिलया विपन्नार्त्तिप्रभञ्जनी। विनीता विनता ब्रध्नतनया विनयान्विता॥
३. विपञ्ची वाद्यकुशला वेणुश्रुतिविचक्षणा। वर्चस्करी बलकरी बलोन्मूलितकल्मषा॥
४. विपाप्मा विगतातङ्का विकल्पपरिवर्जिता। वृष्टिकर्त्री वृष्टिर्जला विधिर्विच्छिन्नबन्धना॥
५. व्रतरूपा वित्तरूपा बहुविघ्नविनाशकृत्। वसुधारा वसुमती विचित्राङ्गी विभावसुः॥
६. विजया विश्वबीजं च वामदेवी वरप्रदा। वृषाश्रिता विषघ्नी च विज्ञानोर्म्यंशुमालिनी॥
७. भव्या भोगवती भद्रा भवानी भूतभाविनी। भूतधात्री भयहरा भक्तदारिद्र्यघातिनी॥