भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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  • काशीखण्ड-पूर्वार्ध * | ७८९ ---|---

हुई, ७४१ भानुमती—प्रकाशवती, ७४२ भाग्यम्—नियतिरूपा, ७४३ भोगवती—विविध प्रकारके भोगोंसे सम्पन्न, ७४४ भृतिः—भरण-पोषणका साधन।^१

७४५ भवप्रिया—भगवान् शंकरकी प्रिया, ७४६ भवद्वेष्ट्री—संसार-बन्धनका नाश करनेवाली, ७४७ भूतिदा—ऐश्वर्य देनेवाली, ७४८ भूति-भूषणा—विभूतिसे विभूषित, ७४९ भाललोचन-भावज्ञा—भगवान् शिवके भावको जाननेवाली, ७५० भूतभव्यभवत्प्रभुः—भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालकी स्वामिनी।^२

७५१ भ्रान्तिज्ञानप्रशमनी—भ्रमात्मक ज्ञानका निवारण करनेवाली, ७५२ भिन्नब्रह्माण्डमण्डपा—ब्रह्माण्डरूपी मण्डपका भेदन करनेवाली, ७५३ भूरिदा—बहुत देनेवाली, ७५४ भक्तसुलभा—भक्तोंको सुगमतापूर्वक प्राप्त होनेवाली, ७५५ भाग्य-वद्दृष्टिगोचरी—भाग्यवानोंको प्रत्यक्ष दर्शन देनेवाली।^३

७५६ भज्जितोपप्लवकुला—भक्तजनोंके उपद्रवोंका नाश करनेवाली, ७५७ भक्ष्यभोज्य-सुखप्रदा—भक्ष्य-भोज्यका सुख देनेवाली, ७५८ भिक्षणीया—अभ्युदय और निःश्रेयसकी इच्छावाले पुरुषोंद्वारा याचना करने योग्य, ७५९ भिक्षुमाता—भिक्षुओं—परमहंसजनोंको माताके समान सुख देनेवाली, ७६० भावी—सबको उत्पन्न करनेवाली, ७६१ भावस्वरूपिणी—पदार्थरूपा।^४

७६२ मन्दाकिनी—स्वर्गा, ७६३ महानन्दा—परमानन्दस्वरूपा, ७६४ माता—सम्पूर्ण विश्वके पापरूपी मलको पुत्रवत्सला माताकी भाँति दूर करनेवाली, ७६५ मुक्तितरङ्गिणी—मोक्षरूप तरंगोंसे सुशोभित, ७६६ महोदया—महान् अभ्युदयरूप, ७६७ मधुमती—अमृतमय जलसे युक्त, ७६८ महापुण्या—महापुण्यस्वरूपा, ७६९ मुदा-करी—हर्षोल्लासकी निधि।^५

७७० मुनिस्तुता—मुनियोंके द्वारा प्रशंसित एवं पूजित, ७७१ मोहहन्त्री—अज्ञानका नाश करनेवाली, ७७२ महातीर्था—महान् तीर्थस्वरूपा, ७७३ मधुस्रवा—मीठे जलका स्रोत बहानेवाली, ७७४ माधवी—विष्णुप्रिया, ७७५ मानिनी—सबके द्वारा सम्मान प्राप्त करनेवाली, ७७६ मान्या—माननीया, पूजनीया, ७७७ मनोरथपथातिगा—मनकी पहुँचसे परे विराजमान।^६

७७८ मोक्षदा—मोक्ष देनेवाली, ७७९ मतिदा—उत्तम बुद्धि देनेवाली, ७८० मुख्या—श्रेष्ठ, ७८१ महाभाग्यजनाश्रिता—बड़भागी मनुष्योंद्वारा सेवित, ७८२ महावेगवती—बड़े वेगसे बहनेवाली, ७८३ मेध्या—पवित्रा, ७८४ महा—उत्सवरूपा, ७८५ महिमभूषणा—अपनी महिमासे विभूषित।^७

७८६ महाप्रभावा—महान् प्रभावसे युक्त, ७८७ महती—विशाल, ७८८ मीनचञ्चल-लोचना—मीनके समान अथवा मीनस्वरूप चंचल नेत्रोंवाली, ७८९ महाकारुण्यसम्पूर्णा—अत्यन्त कृपासे भरी हुई, ७९० महर्द्धिः—बड़ी भारी समृद्धि देनेवाली अथवा महती समृद्धिरूपा, ७९१ महोत्पला—बड़े-बड़े कमलोंको उत्पन्न करनेवाली।^८

७९२ मूर्तिमत्—मूर्तिमान् तेज, ७९३ मुक्ति-


१. भुक्तिमुक्तिप्रदा भेशी भक्तस्वर्गापवर्गदा। भागीरथी भानुमती भाग्यं भोगवती भृतिः॥
२. भवप्रिया भवद्वेष्ट्री भूतिदा भूतिभूषणा। भाललोचनभावज्ञा भूतभव्यभवत्प्रभुः॥
३. भ्रान्तिज्ञानप्रशमनी भिन्नब्रह्माण्डमण्डपा। भूरिदा भक्तसुलभा भाग्यवद्दृष्टिगोचरी॥
४. भज्जितोपप्लवकुला भक्ष्यभोज्यसुखप्रदा। भिक्षणीया भिक्षुमाता भावी भावस्वरूपिणी॥
५. मन्दाकिनी महानन्दा माता मुक्तितरङ्गिणी। महोदया मधुमती महापुण्या मुदाकरी॥
६. मुनिस्तुता मोहहन्त्री महातीर्था मधुस्रवा। माधवी मानिनी मान्या मनोरथपथातिगा॥
७. मोक्षदा मतिदा मुख्या महाभाग्यजनाश्रिता। महावेगवती मेध्या महा महिमभूषणा॥
८. महाप्रभावा महती मीनचञ्चललोचना। महाकारुण्यसम्पूर्णा महर्द्धिश्च महोत्पला॥