भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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७९०* संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

रमणी—मुक्तिरूपा, रमण करने योग्य, ७९४ मणिमाणिक्यभूषणा—मणि-माणिक्यमय आभूषणोंवाली ७९५ मुक्ताकलापनेपथ्या—मोतियोंकी मालासे श्रृंगार करनेवाली, ७९६ मनोनयननन्दिनी—मन और नेत्रोंको आनन्द देनेवाली।^१

७९७ महापातकराशिघ्नी—महापातकोंकी राशिका नाश करनेवाली, ७९८ महादेवार्धहारिणी—महादेवजीके आधे शरीरपर अधिकार करनेवाली गौरीस्वरूपा, ७९९ महोर्मिमालिनी—ऊँची तरंग-मालाओंसे युक्त, ८०० मुक्ता—मुक्तस्वरूपा, ८०१ महादेवी—महादेवी, ८०२ मनोन्मनी—मनको उन्मन (उत्तम ज्ञानसे युक्त) करनेवाली।^२

८०३ महापुण्योदयप्राप्या—महान् पुण्यका उदय होनेपर प्राप्त होनेवाली, ८०४ मायातिमिरचन्द्रिका—मायामय अन्धकारका नाश करनेके लिये चन्द्रप्रभारूप, ८०५ महाविद्या—ब्रह्मविद्यास्वरूपा, ८०६ महामाया—महामाया, ८०७ महामेधा—महान् बुद्धिमती, ८०८ महौषधम्—उत्तम ओषधिरूपा।^३

८०९ मालाधरी—माला धारण करनेवाली, ८१० महोपाया—मुक्तिकी प्राप्तिका महासाधन, ८११ महोरगविभूषणा—महान् सर्प जिसके आभूषण हैं, वह, ८१२ महामोहप्रशमनी—महान् मोहको शान्त करनेवाली, ८१३ महामङ्गलमङ्गलम्—महान् मंगलोंके लिये भी मंगलरूप।^४

८१४ मार्तण्डमण्डलचरी—आकाशगंगारूपसे सूर्यलोकमें विचरनेवाली, ८१५ महालक्ष्मीः—महालक्ष्मीस्वरूपा, ८१६ मदोज्झिता—मदसे रहित, ८१७ यशस्विनी—उत्तम यशसे युक्त, ८१८ यशोदा—सुयश देनेवाली, ८१९ योग्या—सब प्रकारसे सुयोग्य, ८२० युक्तात्मसेविता—जितात्मा पुरुषोंद्वारा सेवित।^५

८२१ योगसिद्धिप्रदा—योगसिद्धि देनेवाली, ८२२ याच्या—प्रार्थनीया, ८२३ यज्ञेशपरिपूरिता—यज्ञेश्वर विष्णुसे व्याप्त, ८२४ यज्ञेशी—यज्ञकी अधिष्ठात्री देवी, ८२५ यज्ञफलदा—स्मरण करनेपर यज्ञोंका फल देनेवाली, ८२६ यजनीया—पूजनीया, ८२७ यशस्करी—यश देनेवाली।^६

८२८ यमिसेव्या—संयमी पुरुषोंद्वारा सेवन करनेयोग्य, ८२९ योगयोनिः—योगकी उत्पत्तिका स्थान, ८३० योगिनी—योगको जाननेवाली, ८३१ युक्तबुद्धिदा—योगयुक्त बुद्धि देनेवाली, ८३२ योगज्ञानप्रदा—योग और ज्ञान देनेवाली, ८३३ युक्ता—मन और इन्द्रियोंको संयममें रखनेवाली, ८३४ यमाद्यष्टाङ्गयोगयुक्—यम, नियम आदि आठ अंगोंवाले योगसे युक्त।^७

८३५ यन्त्रिताघौघसंचारा—पापराशियोंके संचारको नियन्त्रित करनेवाली, ८३६ यमलोक-निवारिणी—यमलोकका निवारण करनेवाली, ८३७ यातायातप्रशमनी—आवागमन अथवा जन्म-मृत्युका कष्ट दूर करनेवाली, ८३८ यातनानाम-कृन्तनी—यातनाका नाम-निशान मिटानेवाली।^८

८३९ यामिनीशहिमाच्छोदा—चन्द्रमा और बर्फके समान स्वच्छ एवं शीतल जलवाली, ८४० युगधर्मविवर्जिता—कलियुगधर्म—हिंसा और असत्य आदिसे सर्वथा रहित, ८४१ रेवती—रेवती नामक नक्षत्रस्वरूपा, ८४२ रतिकृत्—भगवान्‌के


१. मूर्तिमन्मुक्तिरमणी मणिमाणिक्यभूषणा। मुक्ताकलापनेपथ्या मनोनयननन्दिनी॥
२. महापातकराशिघ्नी महादेवार्धहारिणी। महोर्मिमालिनी मुक्ता महादेवी मनोन्मनी॥
३. महापुण्योदयप्राप्या मायातिमिरचन्द्रिका। महाविद्या महामाया महामेधा महौषधम्॥
४. मालाधरी महोपाया महोरगविभूषणा। महामोहप्रशमनी महामङ्गलमङ्गलम्॥
५. मार्तण्डमण्डलचरी महालक्ष्मीर्मदोज्झिता। यशस्विनी यशोदा च योग्या युक्तात्मसेविता॥
६. योगसिद्धिप्रदा याच्या यज्ञेशपरिपूरिता। यज्ञेशी यज्ञफलदा यजनीया यशस्करी॥
७. यमिसेव्या योगयोनिर्योगिनी युक्तबुद्धिदा। योगज्ञानप्रदा युक्ता यमाद्यष्टाङ्गयोगयुक्॥
८. यन्त्रिताघौघसंचारा यमलोकनिवारिणी। यातायातप्रशमनी यातनानामकृन्तनी॥

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