संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 821, कुल 1406 में से
संदर्भ में पढ़ें| ७९२ | * संक्षिप्त स्कन्दपुराण * |
|---|
८९३ लोकत्रयहिता—तीनों लोकोंका हित करनेवाली, ८९४ लोका—लोकस्वरूपा, ८९५ लक्ष्मी:—लक्ष्मीस्वरूपा, ८९६ लक्षणलक्षिता—शुभ लक्षणोंसे उपलक्षिता, ८९७ लीला—भगवत्क्रीडास्वरूपा, ८९८ लक्षितनिर्वाणा—मोक्षका साक्षात्कार करानेवाली, ८९९ लावण्यामृतवर्षिणी—लावण्यमय अमृतकी वर्षा करनेवाली।^१
९०० वैश्वानरी—वैश्वानर-अग्निस्वरूपा, ९०१ वासवेड्या—इन्द्रके द्वारा स्तवन करनेयोग्य, ९०२ वन्ध्यत्वपरिहारिणी—वन्ध्यापनका निवारण करनेवाली, ९०३ वासुदेवाङ्घ्रिरेणुघ्नी—भगवान् विष्णुके चरणोंकी धूलिको धो लेनेवाली, ९०४ वज्रिवज्रनिवारिणी—इन्द्रके वज्रका निवारण करनेवाली।^२
९०५ शुभावती—मंगलमयी, ९०६ शुभफला—शुभ फल देनेवाली, ९०७ शान्ति:—शान्तिस्वरूपा, ९०८ शान्तनुवल्लभा—राजा शान्तनुकी प्रिय पत्नी, ९०९ शूलिनी—त्रिशूल धारण करनेवाली, ९१० शैशववया—बाल्यावस्थासे युक्त, ९११ शीतलामृतवाहिनी—शीतल जलकी धारा बहानेवाली।^३
९१२ शोभावती—शोभायमान, ९१३ शीलवती—सुशीला, ९१४ शोषिताशेषकिल्बिषा—सम्पूर्ण पापोंका शोषण (नाश) करनेवाली, ९१५ शरण्या—शरण लेने योग्य, ९१६ शिवदा—कल्याणदायिनी, ९१७ शिष्टा—श्रेष्ठा, ९१८ शरजन्मप्रसू:—कार्तिकेयकी जननी, ९१९ शिवा—कल्याणस्वरूपा।^४
९२० शक्ति:—आह्लादिनी शक्तिस्वरूपा, ९२१ शशाङ्कविमला—चन्द्रमाके समान उज्ज्वल वर्णवाली, ९२२ शमनस्वसृसम्मता—यमराजकी बहिन यमुनाकी प्रिय सखी, ९२३ शमा—अज्ञानका नाश करनेवाली अथवा शमस्वरूपा, ९२४ शमनमार्गघ्नी—यमलोकके मार्गका निवारण करनेवाली, ९२५ शितिकण्ठमहाप्रिया—नीलकण्ठ महादेवजीकी अत्यन्त वल्लभा।^५
९२६ शुचि:—पवित्रा, ९२७ शुचिकरी—पवित्र करनेवाली, ९२८ शेषा—प्रलयके समय भी शेष रहनेवाली—सच्चिदानन्द ब्रह्मरूपा, ९२९ शेषशायिपदोद्भवा—शेषनागकी शय्यापर शयन करनेवाले भगवान् विष्णुके चरणारविन्दोंसे प्रकट हुई, ९३० श्रीनिवासश्रुति:—भगवान् विष्णुसे जिनका प्रादुर्भाव सुना जाता है, वह, ९३१ श्रद्धा—आस्तिक्य बुद्धिरूपा, ९३२ श्रीमती—शोभायुक्त, ९३३ श्री:—लक्ष्मीस्वरूपा, ९३४ शुभव्रता—शुभव्रतवाली।^६
९३५ शुद्धविद्या—ब्रह्मविद्यास्वरूपा, ९३६ शुभावर्ता—उत्तम भँवरवाली, ९३७ श्रुतानन्दा—श्रवणमात्रसे आनन्द देनेवाली, ९३८ श्रुतिस्तुति:—श्रुतियों (वैदिक मन्त्रों) द्वारा जिसकी स्तुति की जाती है, वह, ९३९ शिवेतरघ्नी—अमंगलकारी पापोंका नाश करनेवाली, ९४० शबरी—किरातरूपधारी भगवान् महेश्वरकी प्रिया, ९४१ शाम्बरीरूपधारणी—मायामय रूप धारण करनेवाली।^७
९४२ श्मशानशोधनी—काशीकी महाश्मशानभूमिको शुद्ध करनेवाली, ९४३ शान्ता—शान्तस्वरूपा, ९४४ शाश्वत्—सनातनी, ९४५ शतधृतिस्तुता—ब्रह्माजीके द्वारा अभिवन्दित, ९४६ शालिनी—शोभायमान, ९४७ शालिशोभाढ्या—धानके हरे-भरे पौधोंकी शोभासे सम्पन्न, ९४८ शिखिवाहन-
१. लोकत्रयहिता लोका लक्ष्मीर्लक्षणलक्षिता। लीला लक्षितनिर्वाणा लावण्यामृतवर्षिणी॥
२. वैश्वानरी वासवेड्या वन्ध्यत्वपरिहारिणी। वासुदेवाङ्घ्रिरेणुघ्नी वज्रिवज्रनिवारिणी॥
३. शुभावती शुभफला शान्तिः शान्तनुवल्लभा। शूलिनी शैशववया शीतलामृतवाहिनी॥
४. शोभावती शीलवती शोषिताशेषकिल्बिषा। शरण्या शिवदा शिष्टा शरजन्मप्रसूः शिवा॥
५. शक्तिः शशाङ्कविमला शमनस्वसृसम्मता। शमा शमनमार्गघ्नी शितिकण्ठमहाप्रिया॥
६. शुचिः शुचिकरी शेषा शेषशायिपदोद्भवा। श्रीनिवासश्रुतिः श्रद्धा श्रीमती श्रीः शुभव्रता॥
७. शुद्धविद्या शुभावर्ता श्रुतानन्दा श्रुतिस्तुतिः। शिवेतरघ्नी शबरी शाम्बरीरूपधारिणी॥