भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,406 पृष्ठ

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पृष्ठ 887

८५८ * संक्षिप्त स्कन्दपुराण *


सम्पन्न हैं, आपको नमस्कार है। एक बार प्रणाम करनेमात्रसे देहधारी जीवोंके देहरूपी बन्धनका निवारण करनेवाले आपको नमस्कार है। खण्डपरशो! अर्धचन्द्रको धारण करनेवाले आपको नमस्कार है। स्कन्दकी उत्पत्तिके स्थान आप गौरीपति गिरीशको नमस्कार है। चन्द्रार्धरूप शुद्ध आभूषणवाले तथा सूर्य-चन्द्र एवं अग्निरूप नेत्रोंवाले आपको नमस्कार है। सम्पूर्ण दिशाएँ आपके लिये वस्त्ररूप हैं, आपको नमस्कार है। आप सम्पूर्ण जगत्‌के स्वामी, जीर्ण (पुरातन) जरा और जन्मका कष्ट हर लेनेवाले, जीवोंको जीवन देनेवाले तथा पाप आदिका अपहरण करनेवाले हैं, आपको नमस्कार है। आपके एक हाथमें डमरू और दूसरे हाथमें धनुष है, आपको नमस्कार है। समस्त जगत्‌के लोचनरूप आप भगवान्‌ त्रिलोचनको नमस्कार है। गंगाधर! आपको नमस्कार है। आप तीन वेदस्वरूप, सदा सन्तुष्ट रहनेवाले और भक्तोंको सन्तोष देनेवाले हैं। आप जगत्‌के उद्धारकी दीक्षासे युक्त हैं, आप देवाधिदेव महादेवको नमस्कार है। सम्पूर्ण पापोंको विदीर्ण करनेवाले, दीर्घदर्शी, प्रपंचसे दूर रहनेवाले तथा सम्पूर्ण दोषोंका दलन करनेवाले आप परम दुर्लभ देवको नमस्कार है। आप चन्द्रमाकी कलाको धारण करनेवाले तथा दोषोंके संग्रहका सर्वथा त्याग करनेवाले हैं। धतूरका फूल आपको अधिक प्रिय है, प्रभो! मस्तकपर जटाभार धारण करनेवाले आपको नमस्कार है। आप धीर, धर्मस्वरूप तथा धर्मके रक्षक हैं। नीलग्रीव! आपको नमस्कार है। जो आपके नामोंका स्मरणमात्र करते हैं, उनके लिये आप तीनों लोकोंका ऐश्वर्य भर देते हैं। आप प्रमथगणोंके अधिपति तथा अपने एक हाथमें सदा पिनाक उठाये रहनेवाले हैं, आपको नमस्कार है। संसारी जीवोंके अज्ञानमय बन्धनको खोलनेवाले आप भगवान् पशुपतिको नमस्कार है। अपने नामका उच्चारण करनेमात्रसे बड़े-बड़े पातकोंको हर लेनेवाले आपको नमस्कार है। आप परसे भी परे, सबको पार उतारनेवाले, कार्य और कारणसे भी परे, अनन्त चरित्रवाले तथा परम पवित्र कथावाले हैं, आपको नमस्कार है। आप वामदेव हैं, अपने आधे अंगमें नारीस्वरूपको धारण करते हैं तथा धर्मस्वरूप वृषभपर यात्रा करनेवाले हैं, आपको नमस्कार है। प्रणतजनोंके भयका निवारण करनेवाले आपको नमस्कार है। आप जगत्की उत्पत्तिके कारण तथा संसार-बन्धनका नाश करनेवाले हैं, आप ही सम्पूर्ण भूतोंका पालन करनेवाले पति हैं, आपको नमस्कार है। महादेव! आपको नमस्कार है। महेश्वर! तेजोंके स्वामी! आपको नमस्कार है। आप पार्वतीके पति और मृत्युंजय हैं, आपको नमस्कार है। आप दक्षके यज्ञका नाश करनेवाले और यक्षराज कुबेरके प्रिय हैं, आपको नमस्कार है। आप बड़े-बड़े यज्ञ करनेवाले, यज्ञस्वरूप तथा यज्ञोंके फल देनेवाले हैं, आपको नमस्कार है। आप रुद्रस्वरूप, रुद्रपति तथा कुत्सित रोदनकारी कष्टको दूर करनेवाले हैं। आप भक्तोंके हृदयमें रमण करते हैं, आपको नमस्कार है। आप त्रिशूलधारी, सनातन ईश्वर, श्मशानभूमिमें विहार करनेवाले, सर्वस्वरूप तथा सर्वज्ञ हैं, भगवती पार्वतीके प्रियतम! आपको नमस्कार है। आप सबका कष्ट हरनेवाले क्षमास्वरूप और क्षेत्रज्ञ हैं। क्षमाशील महेश्वर! आप सब कुछ करनेमें समर्थ, पृथ्वीका संहार करनेवाले तथा दूधके समान गौर हैं, आपको नमस्कार है। अन्धकासुरके शत्रु आपको नमस्कार है। आदि-अन्तसे रहित आप परमेश्वरको नमस्कार है। आप पृथ्वीके आधार, ईश्वर तथा इन्द्र और उपेन्द्र आदि देवताओं-द्वारा प्रशंसित हैं, आप उमाकान्त, उग्र और ऊर्ध्वरेताको नमस्कार है। आप एक रूप, अद्वितीय तथा महान् ऐश्वर्य-स्वरूप हैं, आपको नमस्कार है। आप अनन्तकर्ता तथा पार्वतीके पति हैं, आपको नमस्कार है। आप ही ॐकार, वषट्कार, भूलोक, भुवर्लोक तथा स्वर्लोक हैं। उमापते! इस जगत्में दृश्य और अदृश्य जो कुछ भी है, वह सब आप ही हैं। देव! मैं स्तुति करना नहीं जानता। महेश्वर! आप