भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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७० * संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

और पार्वतीके साथ शीघ्र ही वृषभकी पीठसे उतरकर अपने पुत्रको देखा। देखते ही पार्वती वात्सल्यप्रेममें मग्न हो गयीं। उनके स्तनोंसे दूध बहने लगा। वे बड़े वेगसे आगे बढ़ीं और कुमारको छातीसे लगाकर अपने बहते हुए स्तनका दूध पिलाने लगीं। उस समय सम्पूर्ण देवों और देवांगनाओंने आनन्दमग्न होकर पार्वतीजीकी आरती उतारी। जय-जयकारके महान् शब्दसे आकाशमण्डल गूँज उठा। ऋषि-मुनि वेदमन्त्रोंका उच्चारण करके, गायकोंने गीत गाकर तथा बजानेवालोंने बाजे बजाकर कुमारका अभिनन्दन किया। पुत्रवानोंमें श्रेष्ठ भगवान् शंकर भी उस महातेजस्वी कुमारको अपनी गोदमें बिठाकर अत्यन्त सुशोभित हुए।


## देवताओंका तारकासुर और उनकी सेनाके साथ संग्राम तथा कुमार कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध

लोमशजी कहते हैं—कुमारको अंकमें लेकर जगदीश्वर रुद्रने इन्द्रादि देवताओंसे कहा—'देवगण! यह बालक बड़ा प्रतापी है। इस समय मेरे इस पुत्रसे तुम्हें कौन-सा काम लेना है, बतलाओ।' तब सम्पूर्ण देवताओंने भगवान् पशुपतिसे इस प्रकार कहा—'प्रभो! इस समय सम्पूर्ण जगत्को तारकासुरसे महान् भय प्राप्त हुआ है, इसलिये हम आज ही उसे मारनेके लिये उद्यत हो यहाँसे प्रस्थान करेंगे।' यों कहकर तथा इस कार्यमें भगवान् शंकरकी अनुमति जानकर वे सम्पूर्ण देवगण सहसा वहाँसे चल पड़े और शंकरजीके पुत्र 'कार्तिकेय'को आगे करके महान् असुर तारकपर चढ़ आये। इस युद्धमें ब्रह्मा, विष्णु आदि सब देवता सम्मिलित थे। देवतालोग युद्धके लिये प्रयत्नशील हैं, यह सुनकर महाबली तारकासुर भी बड़ी भारी सेनाके साथ देवताओंसे लोहा लेनेके लिये चल दिया। देवताओंने वहाँ आती हुई तारकासुरकी बड़ी भारी सेनाको देखा।

उसी समय आकाशवाणी हुई—'देवगण! तुम शंकरजीके पुत्रको आगे करके युद्धके लिये उद्यत हो जाओ। संग्राममें दैत्योंको जीतकर निश्चय ही विजयी होओगे।' यह आकाशवाणी सुनकर सब देवता युद्धके लिये उत्सुक हो गये। उसी समय कुमार कार्तिकेयका वरण करनेके लिये मृत्युकन्या 'देवसेना' वहाँ आयी। कुमारने ब्रह्माजीके कहनेसे उसे अंगीकार किया। तबसे शंकरजीके पुत्र कार्तिकेयजी देवसेनापति हो गये। उस समय शंख, नगारे, डंका, ढोल, गोमुख तथा दुन्दुभि आदि बाजे बजने लगे।

देवराज इन्द्र कुमार कार्तिकेयको हाथीपर बिठाकर आगे-आगे चलने लगे। उनके साथ देवताओंकी बड़ी भारी सेना थी और लोकपालोंने भी उन्हें सब ओरसे घेर रखा था। उस समय दुन्दुभि, भेरी और तुर्य आदि अनेक बाजे बज उठे। कुमार इन्द्रको हाथी देकर स्वयं विमानपर जा बैठे। तब इन्द्रने कुमारके मस्तकपर वरुण-