भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,406 पृष्ठ

पृष्ठ 997, कुल 1406 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 997
९६८* संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

और नीलगंगाके संगमपर जाय। उसमें स्नान करके पवित्र हो संगमेश्वर शिवका दर्शन करके ब्राह्मणोंको विविध वस्तुएँ दान दे। वहाँसे व्रती पुरुष पिशाचमोचन तीर्थकी यात्रा करे। उसमें विधिपूर्वक स्नान करके दैनिक कृत्य करे। उसके बाद विद्वान् ब्राह्मणको सवत्सा गौ दान दे। उस तीर्थमें सभी महादान करने चाहिये। तदनन्तर पिशाचेश्वर शिवका दर्शन करके मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। तत्पश्चात् व्रतपालक, नियमपरायण पुरुष गन्धर्वतीर्थकी यात्रा करे और उसमें स्नान करके पवित्र हो एकाग्रचित्तसे पितरोंका श्राद्ध करे। फिर षष्टिंजलपेश्वर देवकी विधिवत् पूजा करनेके अनन्तर ब्राह्मणोंको गृहदान आदि करे। वहाँसे केदार नामक उत्तम तीर्थको जाय और उसमें स्नान करके ब्राह्मणोंको दान दे। उस तीर्थमें कम्बल, मृगचर्म और वस्त्र भी देने चाहिये। ऐसा करनेसे मनुष्य सब पापोंसे शुद्ध होकर शिवलोकमें प्रतिष्ठित होता है। चक्रतीर्थमें स्नान करके मनुष्य भगवान् चक्रपाणिकी भलीभाँति पूजा करे। ऐसा करनेसे वह विष्णुलोकमें पूजित होता है। सोमतीर्थमें स्नान करके सोमेश्वर शिवका दर्शन करनेसे मनुष्यका शरीर निर्मल हो जाता है। उसे कोढ़ आदिका रोग नहीं सताता। वहाँ ब्राह्मणके लिये ईख और गौ आदि दान देना चाहिये। तदनन्तर मनुष्य स्नानके लिये देवप्रयागतीर्थमें जाय और वहाँ स्नान करके पवित्र हो देवमाधवजीकी पूजा करे। फिर विधिपूर्वक ब्राह्मणको गुड़ की बनी हुई गौ दान करनी चाहिये। जो ऐसा करता है, वह सब पापोंसे शुद्धचित्त होकर देवलोकमें प्रतिष्ठित होता है। व्यासजी ! प्रयागमें अति उत्तम वेणी तीर्थ है। वहाँ तिल और आँवलेके साथ स्नान करना चाहिये। स्नानके पश्चात् प्रयागेश्वरका पूजन करके मनुष्य तीर्थसेवनके सम्पूर्ण फलका भागी होता है। वहाँ ब्राह्मणको विधिपूर्वक तिलकी गौ देनी चाहिये। जो ऐसा करता है, वह सम्पूर्ण कामनाओंकी सिद्धिका वरदान पाकर भगवान् विष्णुके लोकमें आनन्द भोगता है। वहाँसे व्रतका पालन करनेवाला पुरुष परम उत्तम योगतीर्थमें जाय और स्नान करके पवित्र हो योगिनीश्वरका पूजन करे। पूजाके पश्चात् वह जलमयी (बर्फकी बनी हुई) गौ दान करे। इससे मनुष्य दीर्घायु और सुखी होता है। तत्पश्चात् कपिलाश्रमतीर्थमें जाय और स्नान-दानादि करके कपिलेश्वरका पूजन करे। ऐसा करनेसे मनुष्य सब पापोंसे मुक्त होकर तपोलोकको जाता है। तदनन्तर शिप्राके पश्चिम तटपर जो घृतकुल्या नामक उत्तम तीर्थ है, वहाँ स्नान करके मनुष्य प्रतिदिन घृतधारयेश्वर शिवका पूजन करे और ब्राह्मणको घृतमयी धेनुका दान करे। ऐसा करके वह पुण्यात्माओंके लोकमें जाता और सब पापोंसे मुक्त होता है। तत्पश्चात् मधुकुल्यातीर्थमें स्नान करके मधुकुल्येश्वर शिवका पूजन करे और मधु एवं इक्षुधेनुका दान करे। उससे आगे सब तीर्थोंका फल प्रदान करनेवाला ऊसर नामक उत्तम तीर्थ है। उसमें स्नान करके मनुष्य ऊसरेश्वर महादेवका दर्शन करे। उस तीर्थमें फल, मूल आदिका दान करना चाहिये। इससे उत्तम मोक्षकी प्राप्ति होती है। जहाँ नरादित्य स्थित हैं, वहाँ भी उत्तम तीर्थ बताया गया है। वहाँ स्नान करनेके पश्चात् मनुष्य क्षेत्रादित्येश्वरका दर्शन करे। दर्शनके पश्चात् रथका दान करे तो भगवान् नरके लोकमें जाता है। भगवान् केशवार्क वहाँके प्रधान देवता हैं। उनका तीर्थ भी बहुत उत्तम बताया गया है। वहाँ स्नान और केशवादित्यका पूजन करना चाहिये। उस तीर्थमें नाना प्रकारके अन्नदानका विधान है। वहाँ स्नान करके पवित्र हो मनुष्य एकाग्रचित्तसे पापनाशिनी भगवती एकानंशाका पूजन करे। तदनन्तर दशाश्वमेधेश्वर शिवकी आराधना करे। ऐसा करनेवाला मनुष्य