सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसौंदर्य लहरी १२७
तत्त्वों की किरणें
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क्षितौ षट्पंचाशद्द्विसमधिकपंचाशदुदके हुताशे द्वाषष्टिश्चतुरधिकपंचाशदनिले दिवि द्विःषट्त्रिंशन्मनसि च चतुःषष्टिरिति ये मयूखास्तेषामप्युपरि तव पादाम्बुजयुगम् ॥
अर्थः— पृथिवी में ५६, जल में ५२, अग्नि में ६२, वायु में ५४, आकाश में ७२, और मन में ६४ मयूखा अर्थात् रश्मियों के ऊपर, हे देवि ! तेरे दोनों चरण कमल हैं ।
सं० टि० मातृका न्यास में छःओं चक्रों का न्यास हंसः सहित उक्त किरणों से संबंधित अक्षरों से किया जाता है ।
उक्त किरणें छः चक्रों से संबंध रखने वाले तत्त्वों की किरणें हैं, और भगवती के चरण युगल सब के ऊपर होने का अभिप्राय यह है कि वे आज्ञा चक्र के ऊपर बिराजते हैं । उक्त किरणों में आधी शिवात्मिका और आधी शक्त्यात्मिका हैं, अर्थात् दो दो के जोडें से पृथिवी में २८, जल में २६, अग्नि में ३१, वायु में २७, आकाश में ३६ और मन में ३२ किरणों के जोडे हैं । सब का योग ३६० है, जो चान्द्र वर्ष के अनुसार एक वर्ष की ३६० तिथियों से उपमित की जाती हैं। प्रत्येक पक्ष की १५ तिथियों को १५ नित्या कहते हैं। श्री चक्रस्थ षोडश दल की गुप्ततर योगिनियां नित्या कहलाती हैं ।