भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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१३० | सौंदर्य लहरी


है क्यों कि भगवती की आराधना का फल महावाक्यात्मक ब्रह्मात्मैक्य अपरोक्षानुभूति का उदय होनाही है ।

सर्वकर्माखिलं पार्थ ज्ञाने परि समाप्यते । (गीता)

६४ तंत्रों से भगवती का तंत्र स्वतंत्र है

[ ३१ ]

चतुः षष्ट्यातन्त्रैः सकलमति(भि)संधाय भुवनं
स्थितस्तत्तत्सिद्धिप्रसवपरतन्त्रैः पशुपतिः ।
पुनस्त्वन्निर्बन्धादखिलपुरुषार्थैकघटना—
स्वतन्त्रं ते तन्त्रं क्षितितलमवातीतरदिदम् ॥

अर्थः— पशुपति शंकर ने ६४ तंत्रों से सारे भुवन को भरकर, जो अपनी २ उन सिद्धियों के देने वाले हैं जो प्रत्येक का अपना विषय है, फिर तत्पश्चात् तेरे आग्रह से सब पुरुषार्थों की सिद्धि देने वाले स्वतंत्र तेरे तंत्र को भूतल पर उतारा ।

सं० टि० भगवती का तंत्र अर्थात् श्री विद्या का तंत्र स्वतंत्र है और सब तंत्र गौण हैं । भगवती के तंत्र से कुण्डलिनी शक्ति को जगाकर सहस्रार में ले जाया जाता है, परन्तु अन्य सब तंत्र धर्म, अर्थ, और काम की ही सिद्धि दे सकते हैं । भगवती का तंत्र चारों पदार्थ देता है ।

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