सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसौंदर्य लहरी २०३
विहार करता है, जिसकी वार्तालाप का परिणाम १८ विद्याओं की व्याख्या है, और जो दोषों से समस्तगुण को इस प्रकार निकाल लेता है जैसे जलमिश्रित दूध से सब दूध को हंस निकाल लेता है ।
संवित् कमल — संवित् का अर्थ ज्ञान है । १२ अरों का अनाहत् चक्र जो सुषुम्ना में स्थित है, उससे यह अष्टदल पद्म पृथक है । इसका स्थान वक्षस् में है ।
अरुणाचल के विख्यात रमणमहर्षि की श्रीरमण गीता में इस कमल का स्थान दक्षिण भाग में होना बताया गया है । रमणगीता के तत्संबंधी श्लोक हम नीचे उद्धृत करते हैं ।
अहंवृत्तिः समस्तानां वृत्तीनां मूलमुच्यते ।
निर्गच्छति यतोऽहंधीर्हृदयं तत्समासतः ॥ (५, ४)
हृदस्य यदि स्थानं भवेच्चक्रमनाहतं ।
मूलाधारं समारभ्य योगस्योपक्रमः कुतः ॥ (५, ३)
अन्यदेव ततो रक्तपिण्डाद्धृदयमुच्यते
अहंहृदितिवृत्या तदात्मनो रूपमीरितम् ॥ (५, ५)
तस्य दक्षिणतो धाम हृत्पीठे नैव वामतः ।
तस्मात्प्रवहति ज्योतिः सहस्रारं सुषुम्नया ॥ (५, ६)
अर्थ:—सब वृत्तियों का मूल अहम्-वृत्ति है, और जिस स्थान पर अहम्-बुद्धि का उदय होता है, वह हृदय है । यदि हृदय