भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

पृष्ठ 301, कुल 415 में से

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सौंदर्य लहरी २५१


४ धारा (आधुनिक धार), ५ मथुरा (आधुनिक मथुरा अथवा मदुरा), ६ भोगवतिका (अमरावती), ७ अवन्ती (आधुनिक उज्जैन) ८ विजया (आधुनिक विजय नगर)।

[ ४९ ]

विशाला कल्याणी स्फुटरुचिरयोध्या कुवलयैः
कृपाधारा धारा किमपि मधुराभोगवतिका ।
अवन्ती दृष्टिस्ते बहुनगरविस्तारविजया
ध्रुवं तत्तन्नामव्यवहरणयोग्या विजयते ॥

कठिन शब्दों का अर्थः— कुवलय = कमल; व्यवहरण = नाना-अर्थों के संदेह को हरण करने वाले।

अर्थः— तेरी दृष्टि विशाला, कल्याणी खिले हुए कमलों की शोभा की उपमा से ऊंची अयोध्या, कृपा की धारा सदृश धारा, कुछ२ मधुरा, भोगवतिका, सबकी रक्षा करने वाली अवन्तिका, और अनेक नगरों के विस्तार को जीतने वाली विजया है, और निश्चय से इन प्रत्येक नगरियों के नाम से संबोधित नाना अर्थों के संदेह को हरण करने के योग्य हैं । अर्थात् प्रत्येक के नाम की भाव सूचक हैं ।

विशाला अर्थात् उदारता के कारण विशाला है। सबका कल्याण करती है, इसलिये कल्याणी है। कमलों की शोभा तेरे सामने हार मानती है, इसलिये अयोध्या है। मधुर होने के कारण मधुरा है।

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