सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 309, कुल 415 में से
संदर्भ में पढ़ेंसौन्दर्य लहरी १०२
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तवार्पणे कर्णे जपनयन पैशुन्य चकिता
निलीयन्ते तोये नियतमनिमेषाः शफरिकाः ।
इयं च श्रीर्बद्धच्छदपुटकवाटं कुवलयं
जहाति प्रत्यूषे निशि च विघटय्य प्रविशति ॥
कठिन शब्दों का अर्थ:— शफरिका=मछली; कुवलय=कुमुद ।
अर्थ:— हे अपर्णे ! निमेष रहित मछलियां तो सदा पानी में छुपी रहती हैं, उनको यह भय रहता है कि कहीं तेरी आंखें ईर्ष्या वश उनकी चुगली तेरे कानों से न करदें, और यह लक्ष्मी सबेरा होने पर कपाटों के सदृश बंद हो जाने वाले दलयुक्त कुमुदिनी को छोड़ जाती है, और रात्रि को उन्हें खोल कर प्रवेश करती है ।
भाव यह है कि भगवती के निमेषोन्मेषवर्जित नेत्रों की प्रतिद्वंद्वी एक तो मछलियां हैं, दूसरी कुमुदिनी हैं । मछली तो पानी में छुपी रहती है, और कुमुदिनी रात्रि को ही खिलती है और दिन में बंद होकर श्री (कांति) हीन हो जाती है ।