भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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२७६ सौंदर्य लहरी


है कि ब्रह्मा के चारों मुख चार वेदों से प्रकृति के हाथों की कृति का व्याख्यान करते हैं। ब्रह्मा को सृष्टि बनाने का जब अहंकार उत्पन्न हुआ तो उनका अहंकार शिवजी ने तोड दिया। वह अहंकार ही पांचवा शिर था।

हाथों का ध्यानः—

(७१)

नखानामुद्योतैर्नवनलिनरागं विहसतां
कराणां ते कान्ति कथय कथयामः कथमुमे ।
कयाचिद्वा साम्यं भवतु कलया हन्त कमलं
यदि क्रीडल्लक्ष्मी चरणतल लाक्षाऽरुण दलम् ॥

अर्थः— हे उमे ! तेरे हाथों की कांति का कहो कैसे वर्णन करूं, जिनके नखों की द्युति नवविकसित कमल की अरुणिमा का परिहास करती है। यदि किसी अंश में किसी प्रकार कमल के दलों की अरुणिमा से सामान्यता की जाय, तो अरे ! वह तो लक्ष्मी के क्रीडा करते समय चरणों में लगी लाक्षा के कारण है।

अर्थात् कमलों की अरुणिमा उनकी स्वाभाविक नहीं है, लक्ष्मी के चरणों में लगी लाख के कारण है, परन्तु भगवती के नखों की अरुणिमा स्वाभाविक है।