सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 327, कुल 415 में से
संदर्भ में पढ़ेंसौंदर्य लहरी २७७
दोनों स्तनों का ध्यान:—
( ७२ )
समं देवि स्कन्दद्विपवदनपीतं स्तनयुगं
तवेदं नः खेदं हरतु सततं प्रस्रुतमुखम् ।
यदालोक्याशंकाऽऽकुलितहृदयो हासजनकः
स्वकुम्भौ हेरम्बः परिमृशति हस्तेन झटिति ॥
कठिन शब्द:— द्विप=हाथी, हेरम्ब=गणेशजी
अर्थ: — हे देवि ! स्कन्द और गणेशजी के पान किये हुए तेरे दोनों स्तन, जिनके मुख से दूध टपक रहा है, सदा हमारे खेद का हरण करें पीते समय जिन स्तनों को देखकर गणेशजी शंका से आकुलित हृदय होकर झट अपने ही सिर के कुंभवत् भागों को टटोलकर हास्यजनक चेष्टा करते हैं ।
अर्थात् गणेशजी को अपने शिर के कुंभ सदृश उभरे हुए मस्तक और मां के स्तनों में भेद न दिखने के कारण शंका हो जाने से वे तुरन्त अपने सिर को टटोलने लगे । बालक दूध पीते समय माता के स्तनों को हाथ में थामकर दूध पीया करता है, परन्तु गणेशजी गलती से अपने ही सिर को पकडने लगे, जिसको देखकर मां हंस पडी ।