भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

पृष्ठ 331, कुल 415 में से

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सौंदर्य लहरी २८१


भगवती के स्तन पान कराने की दैवी कृपा की घटना इस प्रकार घटित हुई बताई जाती है कि एक बार भगवत्पाद के शिशुकाल में जब उनके पिता किसी स्थानान्तर को जाने लगे, तो अपनी धर्मपत्नी को भगवती का पूजन करने को कह गये । परन्तु वे पति की अनुपस्थिति में मासिक धर्म के कारण पूजन नहीं कर सकीं, और बालक शंकर को भगवती का पूजन करने का सुअवसर मिला । भगवती को नैवेद्यार्थ दूध अर्पण किया जाता था । शंकर भगवत्पाद बालपन के भोलेपन से समझे कि भगवती दूध को प्रतिदिन साक्षात् पीया करती थीं, परन्तु उसदिन न पीते देखकर, वे रोकर प्रार्थना करने लगें । बालक के आग्रह से प्रसन्न होकर भगवती प्रकट हो गईं और सारा दूध पी गईं । परन्तु शंकर भगवत्पाद के पिता नैवेद्य का दूध पुत्र को दिया करते थे । भगवती के सारा दूध पी लेने पर बाल शंकर रो पडे । इसपर भगवती को दया आई, और बालक को अपने स्तनों का दूध पिलाया । भगवती के स्तन का पान करते ही शंकर एक उच्चकोटि की कविता में भगवती की स्तुति करने लगे, जो उनके मुख से स्वतः निकलने लगी थी । पिता को घर आकर यह सब सुनने पर बडी प्रसन्नता हुई । फिर भगवती ने उनको स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि यह बालक एक महान पुरुष होगा । यह कथा कैवल्य शर्मा ने लिखी है ।

इसपर कुछ लोग आपत्ति करते हैं कि शंकर भगवत्पाद अपनी लेखिनी से अपनी श्लाघा नहीं कर सकते, इसलिये द्रविड शिशु कोई दूसरा व्यक्ति होना चाहिये, जो भगवत्पाद का सम कालीन था । परन्तु हमें तो, इतना कहने में कि एक शिशु प्रौढ कवियों जैसी