सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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परिशिष्ट (४)
अथ देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम् ।
न मंत्रं नो यंत्रंतदपि च नजाने स्तुति महो
न चाह्वानं ध्यानं तदपि च नजाने स्तुति कथाः ।
नजाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं
परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ॥ १ ॥
अर्थः— हे मां ! मैं न यंत्र जानता हूं, न मंत्र, और फिर अहो स्तुति भी तो नहीं जानता, आवाहन ध्यान और तेरी स्तुति कथा कुछ नहीं जानता, तेरी मुद्रा नहीं जानता, और न रोना ही जानता हूं, परन्तु हे मात ! इतना तो जानता हूं कि तेरा अनुसरण करने से क्लेशों का नाश होता है ।
विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया
विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत् ।
तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे
कुपुत्रोजायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥ २ ॥
अर्थः— तेरी पूजा की विधि का ज्ञान न होने के कारण धन के अभाव से और आलस्य से एवं विधिवत् पूजा करने में अशक्य होने के कारण जो तेरे चरणों से अलग रहा हूं, वह मेरा अपराध क्षमा किया जाने के योग्य है । हे जननि सब का