भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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५४ | सौंदर्य लहरी

श्री विद्या का आधार वेद-वेदांत

जब तक किसी विद्या के आधार वेद नहीं सिद्ध होते, तब तक वह विद्या ऋषियों को मान्य नहीं होती, परन्तु श्री विद्या तांत्रिक है और वह श्री गौडपादाचार्य शंकराचार्य प्रभृति की इष्ट थी, इसलिये उसे श्रुतियों का आधार है यह बात निश्चित ही है। परन्तु हम यहां विशेष रूप से इस विषय पर विचार करने का यत्न करते हैं। वेदों के मत से ईश्वर ही सृष्टि का कारण है। यह बात 'जन्माद्यस्ययतः' (ब्र. १, १, २) में कही गई है। क्योंकि सब शास्त्र ऐसा ही सिद्ध करते हैं और जहां कहीं उनके सृष्टि क्रम में भिन्नता दिखाई देती है, उन सब का समन्वय किया जा सकता है यह बात, 'शास्त्रयोनित्वात्' (ब्रं. १, १, ३) और 'तत्तुसमन्वयात्' (ब्र. १, १, ४) इन दो सूत्रों में सिद्ध की गई है। जो लोग सृष्टि की उत्पत्ति ब्रह्म से स्वतंत्र किसी अन्य प्रकृति तत्व से सिद्ध करते हैं, उनके वादों का खण्डन ग्रंथ के उत्तर भाग में किया गया है। कोई-कोई वाद ईश्वर को मानकर भी प्रकृति की सत्ता स्वतंत्र अथवा अंग-अंगी भाव से बताकर ईश्वर को केवल निमित्त कारण ही मानते हैं, वे वाद भी श्रौत नहीं हैं, जैसा कि श्रुतियों के पढ़ने से स्पष्ट प्रतीत होता है। क्योंकि कहीं तो सृष्टिका उदय ईश्वर के ईक्षण या कामनासे वर्णित है, कहीं एजृत्व अर्थात स्पन्दनसे वर्णित है, कहीं मायासे, कहीं शक्ति से, कहीं प्रकृति से। उस परमात्म शक्ति कोही कही आकाश, कहीं अग्नि, कहीं माया, कहीं प्राण, कहीं वायु, कहीं प्रकृति प्रभृति शब्दों से व्यक्त किया गया है। इसका कारण यह है कि उस आदि शक्ति का स्वरूप किसी की समझ में नहीं आ सकता, इसलिये