भारतकोश
स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

Spanda Nirnaya of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary

आचार्य वसुगुप्त / क्षेमराज द्वारा

DevanagariHindipublished519 पृष्ठ

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परिचय एवं पृष्ठभूमि ५५ सृष्टि = एक क्रीड़ा है—'हर्षानुसारी स्पन्द' है—सोमानन्दः 'शिवदृष्टि' 'यथा नृपः सार्वभौमः प्रभावामोदभावितः । क्रीडन्करोति पादातधर्मांस्तद्धर्मधर्मतः । तथा प्रभुः प्रमोदात्मा क्रीडत्येवं तथा तथा ।। (शिवदृष्टि) । हर्षानुसारी स्पन्दः क्रीडा ।। (सोमानन्द) ।। परोपादाननिरपेक्ष इच्छासृष्टिवाद— योगिनामिच्छया यद्वन्नानारूपोपपत्तित । न चास्ति साधनं किंचिन्मृदादीच्छां विना प्रभोः । तथा भगविदच्छैव तथात्वेन प्रजायते ।। (शिवदृष्टि) सर्वशिववाद— 'एवं सर्वेषु भावेषु यथा सा शिवरूपता ।। 'सर्वस्य शिवरूपत्वस्' (शिवदृष्टि) एवं सर्व पदार्थानां समैव शिवता स्थिता ।।' (सोमानन्द) (अण्ड चतुष्टयात्मक) विश्व— [चित्र: अण्ड-मण्डल — शाक्ताण्ड, मायाण्ड, प्रकृत्यण्ड, ब्रह्माण्ड, पिण्ड] [वृत्त १: शिव तत्त्व / शान्त्यातीत / कला] — अण्ड-हीन [वृत्त २: शाक्ताण्ड / शान्ति / कला] — शुद्धाध्वा में स्थित । मायोपरि । ज्योतिर्मय शुद्ध सत्त्वात्मक । शुद्ध विद्या । सदाशिव एवं ईश्वर = उपादान तत्त्व । [वृत्त ३: मायाण्ड / शान्ति / कला] — एक मायाण्ड में असंख्य प्रकृत्यण्ड स्थित है । [वृत्त ४: प्रकृत्यण्ड / प्रतिष्ठा / कला] — १. असंख्य । २. जल तत्त्व से प्रकृति पर्यन्त । ३. प्र० में असंख्य ब्रह्माण्ड है । ४. उपादान—जल से प्रकृति तत्त्व समूह । [वृत्त ५: ब्रह्माण्ड / निवृत्ति / कला] — १. असंख्य । २. $\rightarrow$ १४ लोक (पुराण) (७ ऊर्ध्व + ७ अधोलोक) [वृत्त ६: रिक्त] — जगत—'कदाचिदात्म प्रच्छादनात्मकाभेदाख्यातिमयीं संसार रूपां भ्रान्तिं क्रीडामेव कथंचन तथा स्वभावत्वात् कुर्वतो'—सोमानन्द । (१) मायोपरिस्तर पर संक्षुब्ध 'बिन्दु' $\rightarrow$ नाद-ज्योति (वाच्य वाचक अध्वा) (२) वाचकाध्वा में—वर्ण, पद, मन्त्र । (३) वाच्याध्वा में— (क) कला, (तत्त्व, भुवन) $\downarrow$ शान्त्यातीत शान्ति विद्या प्रतिष्ठा निवृत्ति (ख, ग) तत्त्व भुवन । । ३६ असंख्य