भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

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( १०८ ) प्रवृत्ति निवृत्तिभेदनैकार्थ वृत्तित्वं सामानाधिकरण्यम् । तत्र सत्यं ज्ञानादिपदमुख्यार्थैर्गुणैस्तत्तद्गुणविरोधाकार प्रत्यनीकाकारैर्वैक- स्मिन्नेवार्थे पदानां प्रवृत्तौ निमित्तभेदोऽवश्याश्रणीयः । इयांस्तु विशेषः एकस्मिन्, पक्षे पदानां मुख्यार्थता, अपरस्मिंश्च तेषां लक्षणा । न च अज्ञानादीनां प्रत्यनीकता वस्तुस्वरूपमेव, एकेनैव पदेन स्वरूपं प्रतिपन्नमिति पदान्तरप्रयोगवैयर्थ्यात् । तथा सति सामानाधिकरण्यासिद्धेश्च, एकस्मिन् वस्तुनि वर्त्तमानानां पदानां निमित्तभेदाना श्रयणात् । न च एकस्यैवार्थस्य विशेषणभेदेन विशिष्टताभेदानेकार्थत्वं पदानां सामानाधिकरयविरोधि, एक स्यैववस्तुनो अनेकविशेषणविशिष्टता प्रतिपादन परत्वात्सामाना- धिकरण्यस्य “भिन्न प्रवृत्तिनिमित्तानां शब्दानामेकस्मिन्नर्थे वृत्तिः सामानाधिकरण्यम्” इतिहिशाब्दिकाः । “ब्रह्म सत्य ज्ञान अनन्त स्वरूप है” इस श्रुति में भी ब्रह्म के साथ सत्य आदि पदों का सामानाधिकरण्य (विशेषण विशेष्यभाव का अभेद) होने से ब्रह्म की निर्विशेषता सिद्ध नहीं होती । अनेक गुण युक्त एक वस्तु का प्रतिपादन करना ही, सामानाधिकरण्य का कार्य है । विभिन्न अर्थों में प्रयोज्य शब्दों की एकार्थपरता को ही सामानाधिकरण्य कहते हैं । इसलिए सत्य ज्ञान आदि शब्दों का मुख्यार्थ, सत्यता आदि गुण रूप हो, अथवा उसके विरोधी गुण के आकारवाला हो, इन दोनों में से किसी भी एक अर्थ के ज्ञापक होने से, पदों की प्रवृत्ति, भिन्न निमित्त स्वीकारनी होगी । यही एक विशेषता होगी कि, पदों का पहिला अर्थ मुख्य तथा दूसरा अर्थ लाक्षणिक होगा। यह भी नहीं कहा जा सकता कि सत्य आदि पदों का, अज्ञान आदिविपरीत अर्थ ही वस्तु (ब्रह्म) का स्वरूप है । क्योंकि एक ही पद से जब स्वरूप सिद्ध हो जाता है तो अन्य पदों का प्रयोग करना व्यर्थ है । उक्त बात मानने से तो सामानाधिकरण्य असिद्ध हो जायगा, क्योंकि एक वस्तु में वर्त्तमान पदों का निमित्त भेद न होगा (सामानाधिकरण्य में निमित्त भेद आवश्यक है) यदि कहो कि-विशेषण के भेदानुसार एक ही वस्तु का गुणगत भेद तो रहेगा ही; इससे तो ankurnagpal108@gmail.com