श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १८० ) कर नामरूप की अभिव्यक्ति करूँ" इस श्रुति में परमात्मा पर्यन्त समस्त वस्तुओं को नामरूपात्मक बतलाया गया है इसलिए ब्रह्म में अज्ञान कल्पना निष्प्रयोजन सिद्ध होती है। इतिहास पुराण में भी ब्रह्माज्ञानवाद की कहीं चर्चा नहीं है । ननु—"ज्योतींषिविष्णुः" इति ब्रह्मैकमेव तत्त्वमिति प्रतिज्ञाय "ज्ञानस्वरुपो भगवन्यतोऽसौ" इति शैलाब्धिधरादिभेद भिन्नस्य जगतो ज्ञानैकस्वरूपब्रह्माज्ञानविजृम्भितत्वमभिधाय "यदा तु शुद्धं निजरूपस्यैव ब्रह्मणः स्वस्वरूपावस्थितिवेलायां वस्तुभेदाभावदर्श- नेनाज्ञान "विजृम्भितत्वमेव स्थिरीकृत्य" वस्त्वस्ति कि ? "महीघट- त्वम्" इति श्लोकद्वयेन जगदुपलब्धि प्रकारेणापि "वस्तुभेदानाम् "सत्यत्वमुपपाद्यतस्मात् विज्ञानभूते" इति प्रतिज्ञातं ब्रह्मव्यतिरिक्त स्यासत्यत्वमुपसंहृत्य "विज्ञानमेकं" इति ज्ञानस्वरूपे ब्रह्मणि