भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

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( २६६ ) जो यह कहते हैं कि-प्रतिज्ञा और दृष्टांत के अनुसार, वेदांत वाक्य, प्रधान के अनुरूप ही घटित होते हैं, यह भी असंगत बात है, इसका कोई कारण उपलब्ध नहीं होता । "जिसके द्वारा अश्रुत विषय भी श्रुत होता है" एक के जानने से सबका ज्ञान होता है "ये वाक्य निम्नांकित शंका "सर्वात्मा ब्रह्म में ऐसा होना असंभव है" के निवारणार्थ ही प्रस्तुत किए गए हैं "ईक्षण" क्रिया श्रवण-से ही संबंधित है, आनुमानिक प्रधान में संकल्प-श्रवण आदि का नितांत अभाव है । अथ स्यात्—न चेतनगतं मुख्यमीक्षणमिहोच्यते, अपि प्रधानगत- गौणमीक्षणं "तत्तेज ऐक्षत वा आप ऐक्षन्त" इति गौणेक्षण साहचर्यात् । भवति चाचेतनेष्वपि चेतनधर्मोपचारः यथा—"वृष्टि प्रतीक्षाः शालयः" "वर्षेण बीजं प्रतिसंजहर्ष" इति अतो गौणमीक्षण- मितीमामाशंकामनुभाष्य परिहरति । जो यह कहते हैं कि—सृष्टि प्रकरण में जिस ईक्षण क्रिया का प्रयोग किया गया है, वह चेतन संबंधी मुख्य ईक्षण नहीं है, अपितु प्रधान संबंधी गौण ईक्षण है, जैसा कि—"तत्तेज ऐक्षत" इत्यादि में तेज और जल आदि जड पदार्थों की ईक्षण क्रिया के प्रयोग से निश्चित होता है । जड पदार्थों में भी चेतन पदार्थों का सा औपचारिक प्रयोग किया जाता है, जैसे कि— 'शालि (धान) के पौधे वृष्टि की प्रतीक्षा करते हैं वर्षा से बीजों को हर्ष होता है" इत्यादि से गौण ईक्षण ही सिद्ध होता है इस शंका का परिहार कर रहे हैं— गौणश्चेन्नात्म शब्दात् १।१।६॥ यदुक्तम्—गौणेक्षणसाहचर्यात् सतोऽपीक्षणव्यपदेशः सर्गनीयत- पूर्वावस्थाभिप्रायो गौण इति । तन्न "ऐतदात्म्यमिदं सर्वं तत्सत्यं स आत्मा" इति सच्छब्दप्रतिपादितस्य आत्मशब्देन व्यपदेशात् । एतदुक्तं भवति "ऐतदात्म्यमिदं सर्वम् स आत्मा" इति चेतना- चेतनप्रपञ्चोद्देशेन सत् आत्मत्वोपदेशोऽयं नाचेतने प्रधाने संगच्छत ankurnagpal108@gmail.com