भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

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इस प्रकार प्रधान शब्द वाच्य प्रकृति से भिन्न परब्रह्म की, जीवा- त्मा से भी भिन्नता सिद्ध होती है। ७. अधिकरणः— यद्यपि मन्दपुण्यानां जीवानां कामाज्जगत्सृष्टिरतिशयिता- नन्दयोगो भयाभय हेतुत्वमित्यादि न संभवत्येवेतीमामाशंकां निरा- करोति । यद्यपि अल्पपुण्य वाले जीवों में संकल्पमात्र से सृष्टि, अतिशय आनंद योग, भय या अभय देने की शक्ति आदि संभव नहीं है, फिर भी विलक्षण पुण्यवान जीवविशेष आदित्य, इन्द्र प्रजापति आदि में तो ये संभव हैं फिर परमात्मा ही जगत् के कारण हैं ऐसा क्यों कहते हैं ? इस शंका का निराकरण करते हैं— अन्तस्तद्धर्मोपदेशात् १।१।१२ ॥ इदमाम्नायते छांदोग्ये 'य एषोऽन्तरादित्ये हिरण्मयः पुरुषो दृश्यते हिरण्यश्मश्रुर्हिरण्यकेश आप्रणखात्सर्व एव सुवर्णः तस्य यथा कप्या

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