श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
DevanagariHindipublished696 पृष्ठ
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"अक्षरात्परतः परः"
इति च सर्वस्मात्
Line 22:
विकारात् परभूतादक्षरादस्मात्परः क्षेत्रज्ञ समष्टि पुरुषः प्रति-
Let's check:
विकारात्परभूतादक्षरादस्मात्परःक्षेत्रज्ञ समष्टि पुरुषः प्रति-
Line 23:
पाद्यते ।
Line 24:
आथर्वणिक शाखा में कहा गया कि—"अब पराविद्या का व्याख्यान
Wait, look at line 24:
आथर्वणिक or आथर्वाणिक?
There is no aa-matra on थ. But on व: आथर्वणिक or आथर्वाणिक?
Wait, there is a dot or aa-matra?
Let's look: आ थ र्व णि क - no, wait, is there an aa-matra on थ or व?
Wait, look at line 24:
आ, थ, र्वा, णि, क - wait, look at 'र्वा': it has a vertical bar! So आथर्वाणिक!
Wait, in line 4: माध्यन्दिन
In line 9: माध्यन्दिन
In line 24: आथर्वाणिक