भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished696 पृष्ठ

पृष्ठ 50, कुल 696 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 50

३७ ८ फलाधिकरण [सूत्र ३७-४०] १. हर प्रकार के फल प्रदान में ब्रह्म की कत्तृं ता का वर्णन। २. जैमिनि के मत से धर्म से फलप्राप्ति का वर्णन। ३. बादरायण के मतानुसार परमेश्वर की फल प्रदानता का उपपादन। —पृ० ६६२-६६, (तृतीय पाद) १. सर्ववेदांत प्रत्ययाधिकरण [सूत्र १-५] विभिन्न वैदिक शाखाओं में विहित एक जातीय ब्रह्मोपासना की एकता का वर्णन। उपासना की एकता के संबंध में की गई शंका का समाधान। यज्ञांग स्नान के दृष्टान्त से शिरोव्रत की अध्ययनांगता का निरूपण। श्रुति के आधार पर विद्या की एकता का समर्थन। एक उपासना में कथित गुणों का तत्समान जातीय उपासना में उपसंहार के प्रयोजन का निरूपण। —पृ० ६६७-७२, २. अन्यथात्वाधिकरण [सूत्र ६-६] १. पूर्वपक्ष—छांदोग्य और बृहदारण्यक में वर्णित उद्गीथ विद्या की भिन्नता का संशय। २. (सिद्धान्त)—छांदोग्य और बृहदारण्योक्त उद्गीथो- पासना के स्वरूपगत भेद के आधार पर दोनों की पृथकता और विद्याभेद का प्रतिपादन। उद्गीथ की प्रणवार्थता का निरूपण। —पृ० ६७२-७६, ३. सर्वभेदाधिकरण [सूत्र १०] ज्येष्ठ श्रेष्ठ आदि गुणों के योग से प्राणोपासना की एकता प्रतिपादन। —पृ० ६७६-८३, ४. आनन्दाधिकरण [सूत्र ११-१७] आनन्द आदि ब्राह्म गुणों का सभी उपासनाओं में चिन्तन का उपदेश। प्रियशिर आदि गुणों का सभी ankurnagpal108@gmail.com