भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

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३६ जगह उपसंहार किये जाने का निराकरण । प्रिय- शिर आदि गुणों की अपेक्षा आनन्द आदि गुणों की विलक्षणता का निरूपण । प्रियशिर आदि गुणों का प्रयोजन वर्णन । प्रियशिर आदि गुणों की अब्रह्मता का वर्णन । परमात्मा के आनन्द गुण का वर्णन । आनन्द आदि गुणों की परमार्थधर्मता का निरूपण । —पृ० ६८३-८६, ५. कार्याख्यानाधिकरण [सूत्र १८] भोजन के पूर्व और उत्तर काल में आचमनीय जल की प्राणवासना का निरूपण । —पृ० ६८६-६१, ६. समानाधिकरण [सूत्र १६] अग्नि रहस्य और बृहदारण्य की शाण्डिल्य विद्या की एकता का निरूपण । —पृ० ६६१-६२, ७. संबंधाधिकरण [सूत्र २०-२२] ब्रह्मोपासना के अंग "अहः और अहम्" इन दो नामों की प्रयोजनीयता निरूपण । स्थान भेद से उक्त दोनों के पृथक प्रयोग का निरूपण । श्रुति द्वारा स्वाभिमत [