भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished696 पृष्ठ

पृष्ठ 556, कुल 696 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 556

विशिष्ट गुणों का निर्देश है, वह ज्ञातव्य है' इत्यादि से सिद्ध होता है कि-दहराकाश परब्रह्म है । गतिशब्दाभ्यां तथाहि दृष्टं लिंग च ।१।३।१४॥ इतश्च दहराक शः परंब्रह्म "तद्यथा हिरण्य निधिं निहितमक्षे त्रज्ञा उपर्युपरि संचरंतो न विन्देयुरेवमेवेमाः सर्वाः प्रजा अहरहर्ग- च्छन्त्य एतं ब्रह्मलोकं न विन्दत्यनृतेन हि प्रत्यूढाः” इति एतमिति प्रकृतं दहराकाशं निर्दिश्य तत्राहरहःसर्वेषां क्षेत्रज्ञानां गमनं, गंतव्यस्य तस्य दहराकाशस्य ब्रह्मलोकशब्द निर्देशश्च दहराकाशस्य परब्रह्मतां गमयतः । इसलिए भी दहराकाश परब्रह्म है कि-“जैसे भूविद्या को न जानने वाले, भूमि के ऊपर-ऊपर ही घूमते रहते हैं, भूमिस्थ सुवर्णराशि को प्राप्त नहीं करते, वैसे ही सांसारिक प्रवाह में बहते हुए प्राणी, ब्रह्मलोक की प्राप्ति नहीं कर पाते, क्योंकि वे अज्ञान से आवृत हैं” इस वाक्य में "एतं” पद से उल्लेख्य ब्रह्मलोक को बतलाकर-समस्त प्रजाओं के नित्य गमन की बात कही गई, तथा दहराकाश शब्द से ब्रह्मलोक का उल्लेख किया गया, इन दोनों से दहराकाश की परब्रह्मता ज्ञात होती है । कथमनयोरस्य परब्रह्मत्वसाधकत्वमित्यत आह-तथाहि दृष्टम् इति । परास्मिन् ब्रह्मणि सर्वेषां क्षेत्रज्ञानामहरहस्सुषुप्तिकाले गमन- मभ्यत्राभिधीयमानं दृष्टम् “एवमेव खलु सोम्येमास्सर्वाः प्रजाः सति संपद्य न विदुः सति संपत्स्यामहै” इति । “सत आगम्य न विदुः सत् आगच्छामह" इति च । तथा ब्रह्मलोक शब्दश्च परास्मिन् ब्रह्मणि दृष्टः 'एष ब्रह्मलोकः सम्राडिति होवाच” इति । माभूदन्यत्र ब्रह्मणि गमन दर्शनम्, एतदेव तु दहराकाशे सर्वेषा क्षेत्रज्ञानां प्रलयकाल एव निरस्तनिखिलदुःखानां सुषुप्तिकालेऽवस्थानं श्रूयमाणम- स्य परब्रह्मत्वे पर्याप्तं लिंगम् । तथा ब्रह्मलोक शब्दश्च समानाधि- करण वृत्त्याऽस्मिन्दहराकाशे प्रयुज्यमानोऽस्य ब्रह्मत्वे प्रयोगान्तर

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक) · पृष्ठ 556, कुल 696 में से · BharatKosha