भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

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४६ ९. रश्म्यनुसाराधिकरण (सूत्र १७) सूर्य रश्मियों के सहारे उपासक के ऊर्ध्वगमन का विश्लेषण। —पृ० ११५७-५८ १०. निशाधिकरण (सूत्र १८) दक्षिणायन में भी मृत उपासक की ब्रह्म प्राप्ति का निरूपण। दक्षिणायन और दोनों मार्गों की नित्यस्मरणीयता का प्रतिपादन। —पृ० ११५८-६३ (तृतीय पाद) १. अर्चिराद्यधिकरण (सूत्र १) मृत्यु के बाद उपासक की अर्चिरादि गति का निरूपण। —पृ० ११६४-६५ २. वाय्वधिकरण (सूत्र २) संवत्सरगति के बाद आदित्य पूर्वं वायु प्राप्ति का वर्णन। —पृ० ११६७-७० ३. वरुणाधिकरण (सूत्र ३) विद्युत्प्राप्ति के पूर्व वारुणी गति का समर्थन। —पृ० ११७०-७२ ४. आतिवाहिकाधिकरण (सूत्र ४-५) अर्चिरादि शब्दों का आतिवाहिक अर्थ निरूपण, —पृ० ११७२-७४ ५. कार्याधिकरण (सूत्र ६-१६) विद्युत लोक के वैद्युत पुरुषों द्वारा उपासक की ब्रह्म प्राप्ति का निरूपण। १ बादरि आचार्य के मत से उपासकों की हिरण्यगर्भ लोक प्राप्ति का निरूपण। हिरण्यगर्भ में ब्रह्म शब्द की गौणार्थता का निरूपण। कर्त्तव्य के अवसान में हिरण्यगर्भ सहित ब्रह्मलोक वासियों की मुक्ति का समर्थन। ankurnagpal108@gmail.com