भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

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एवमेवैत आत्मान एनं भुञ्जन्ति" इति । तथा "क्वौषा एतद् बालाके पुरुषोऽशयिष्ट क्व वा एतदभूत् कुत एतदायात्" इति पृष्टमर्थमजा- नते तस्मै स्वयमेवाजातशत्रुरुवाच - "हिता नाम नाड्यस्तासु तदा भवति यदा सुप्तः स्वप्नं न कथंचन पश्यत्यथास्मिन् प्राण एवैकधा भवति तदैनं वाक् सर्वैर्नामभिः सहाप्येति मनः सर्वैः ध्यानैः सहाप्येति स यदा प्रतिबुध्यते यथाग्नेर्ज्वलतः सर्वा दिशो विस्फुलिंगा विप्रतिष्ठे- रन्नेवमेवैतस्मादात्मनः प्राणा यथायतनं विप्रतिष्ठते प्राणेभ्यो देवा देवेभ्यो लोकाः" इति सुषुप्त्याधारतया स्वप्नसुषुप्तिजागरितावस्थासु वर्त्तमानं वागादिकरणाप्ययोद्गमस्थानमेव जीवात्मानम् "अथास्मिन् प्राण एवैकधा भवति" इत्युक्तवान् । प्रकरण के उत्तर भाग में कहा गया है कि- "वे दोनों सोए हुए पुरुष के निकट आए, और छड़ी से प्रहार किया" इत्यादि में सुप्त के पास आना और छड़ी के प्रहार से उठाना आदि, भोक्तृप्रतिपादन के ही चिन्ह हैं [ प्रकृत आत्मा देह इन्द्रिय आदि से भिन्न तत्त्व है, यह समझाने के लिए, अजातशत्रु बालाकि के साथ एक सोते पुरुष के पास जाकर छड़ी से मारने लगे, उसकी निद्रा भंग हो गई। इससे स्पष्ट हो गया कि- यह आत्मा यदि भोक्ता न होता तो, छड़ी के स्पर्श से उसमें संज्ञा का संचार न होता, छड़ी का स्पर्श भी एक प्रकार का भोग ही है, तभी तो उसे संज्ञा प्राप्त हुई ] । इसी प्रकार प्रकरण के पूर्व भाग में भी भोक्ता का प्रतिपादन किया गया है, जैसे- "सेठ जिस प्रकार धन का भोग करता है, ठीक उसी प्रकार यह प्रज्ञात्मा भी, इन देह इन्द्रिय आदि से भोग करता है, ये देहेन्द्रिय आदि भी उसका भोग करते हैं" तथा- "हे बालाकि ! यह जो पुरुष है, जब सोया था, तब कहाँ था, अब यह कहाँ से आया ?" इस प्रश्न द्वारा बालाकि को अज्ञानी जानकर अजातशत्रु ने स्वयं ही उससे कहा- "हिता नाम की जो, हृदय से संवद्ध शरीर में व्याप्त नाडियाँ हैं, उनके द्वारा, बुद्धि सहित हृदय में जाकर शयन करता है, सुषुप्ति में वह स्वप्न नही देखता, उस समय सारे प्राण एकत्र होकर स्थित रहते हैं, वागेन्द्रिय समस्त शब्दों के साथ उसके निकट पहुँच जाती