श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
पृष्ठ 663, कुल 696 में से
संदर्भ में पढ़ें( ६०३ ) वह परमात्मा ही है। “उसे जानकर ही मृत्यु को अतिक्रमण करता है” “उसको भली भाँति जानकर इस लोक में ही अमर हो जाता है, इसके अतिरिक्त मुक्ति का कोई दूसरा मार्ग नहीं है” इत्यादि में परम पुरुष परमात्मा को ही एक मात्र ज्ञेय और उपायरूप प्रतिपादन किया गया है। परम पुरुष परमात्मा के विभूतिरूप, मोक्ष प्राप्त करने वाले जीवात्मा का जो स्वरूपगत यथार्थ ज्ञान है, उसे भी मुक्ति प्राप्ति के उपायभूत परमात्मज्ञान का उपयोगी बतलाया गया है। स्वतः उसकी उपायरूप से कोई सत्ता नहीं है। इससे सिद्ध होता है कि-इस प्रसंग में 'द्रष्टव्य” इत्यादि वाक्य में मोक्षोपायरूप से परमात्मा का ही उपदेश दिया गया है। तथा-“तस्य ह वा एतस्य महतोभूतस्य निश्वसितमेतद्यद् ऋग्वेदः” इत्यादिना कृत्स्नस्यजगतः कारणत्वमुच्यमानं परमपुरुषाद न्यस्य कर्मपरवशस्यमुक्तस्यनिर्व्यापारस्य च पुरुषमात्रस्य न संभवति । तथा “आत्मनो वा अरे दर्शनेन” इत्यादिना एकविज्ञानमभिधीय-