श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 1199, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंनौवाँ अध्याय 9/74-79 ] अनुवाद-शियाली-भैरवीदेवी [दुर्गादेवी] का दर्शनकर श्रीशचीनन्दन कावेरीके तटपर आये ॥ 74 ॥ अनुभाष्य- 'शियालि'-ताञ्जोर जिलेमें है। ताञ्जोर नगरसे अड़तालीस मील उत्तर-पूर्व दिशामें शियाली तालुक (मौजा)के अन्तर्गत एक प्रधान ग्राम है। इस स्थानपर एक विख्यात शैव-मन्दिर और एक बहुत बड़ा सरोवर है। 'तिरुज्ञान सम्बन्धर्' नामक एक शिवभक्तने यह मन्दिर भेंट किया था। (किंवदन्ती)-यह शिवभक्त शिशुकालमें जब मन्दिरमें आया था, तब भैरवीने उसको स्तनपान कराया था (ताञ्जोर गेजेटियार)। (इस अध्यायके 358 संख्या पयारका अनुभाष्य देखें)। वहाँसे महाप्रभु त्रिचिनपल्ली जिलेमें कोलिरण अथवा कावेरी नदीके तटपर आये। 'कावेरी'- "कावेरी च महापुण्या" (भाः 11/5/40) ॥ 74 ॥ कावेरीके तटपर शम्भुका दर्शन :- गो-समाजे शिव देखि' आइला वेदावन। महादेव देखि' ताँरे करिला वन्दन ॥ 75 ॥ अनुवाद-गो-समाज नामक स्थानपर शिवजीका दर्शन करके महाप्रभुने वेदावनमें जाकर महादेवका दर्शन करके उनकी वन्दना की ॥ 75 ॥ अनुभाष्य- 'गो-समाज'- शैवतीर्थ है। 'वेदावन'-ताञ्जोर जिलेके तिरुत्तराइमण्डि-तालुकके दक्षिणपूर्व-कोणमें और पयेन्ट कलिमियारके पाँच मील उत्तरमें स्थित है। वहाँके ब्राह्मणोंके मतानुसार तीर्थोंके महत्त्वके हिसाबसे रामेश्वरके बाद इसका स्थान आता है (ताञ्जोर गेजेटियार) ॥ 75 ॥ महाप्रभुकी कृपासे शैवोंको वैष्णवताकी प्राप्ति :- अमृतलिङ्ग-शिव देखि' वन्दन करिल। सब शिवालये शैव 'वैष्णव' हइल ॥ 76 ॥ अनुवाद-महाप्रभुने अमृतलिङ्ग-शिवके दर्शनकर उनकी वन्दना की। महाप्रभुके प्रभावसे सभी शिवालयोंके शैव वैष्णव बन गये ॥ 76 ॥ देवस्थानमें विष्णुदर्शन और 'श्रीवैष्णवों'के सङ्ग आलाप :- देवस्थाने आसि' कैल विष्णु-दरशन। श्री-वैष्णवेर सङ्गे ताँहा गोष्ठी अनुक्षण ॥ 77 ॥ अनुवाद-देवस्थान आकर महाप्रभुने भगवान् विष्णुका दर्शन किया और वहाँ रहनेवाले 'श्रीवैष्णव' सम्प्रदायके लोगोंके साथ बहुत समय इष्टगोष्ठी की ॥ 77 ॥ कुम्भकोणममें सरोवर-दर्शन, शिवक्षेत्रमें शिव-दर्शन :- कुम्भकर्ण-कपाले देखि' सरोवर। शिव-क्षेत्रे शिव देखे गौराङ्गसुन्दर ॥ 78 ॥ अनुवाद-तब कुम्भकर्ण-कपालमें महाप्रभुने एक विशाल सरोवरका दर्शन किया। तत्पश्चात् श्रीगौराङ्गसुन्दरने शिवक्षेत्र नामक स्थानपर शिवजीका दर्शन किया ॥ 78 ॥ अमृतप्रवाह भाष्य- 'कुम्भकर्ण कपाले' - कुम्भकर्णकी खोपड़ीसे जो सरोवर बना था ॥ 78 ॥ अनुभाष्य- 'कुम्भकर्ण कपाले'-'कपाल' अर्थात् खोपड़ी। कुम्भकर्ण ही ताञ्जोर जिलेमें स्थित वर्तमान कुम्भकोणम-नगर है। यह ताञ्जोर नगरसे बीस मील उत्तर पूर्व दिशामें है। इस स्थानपर बारह शिवमन्दिर, चार विष्णुमन्दिर और एक ब्रह्मामन्दिर है (ताञ्जोर गेजेटियार)। 'शिवक्षेत्र'-ताञ्जोर नगरमें एक शिवगङ्गा-सरोवर है। यहाँ एक विशाल बृहतीश्वर-शिव-मन्दिर है ॥ 78 ॥ पापनाशनमें विष्णुके दर्शनके बाद श्रीरङ्गमें जाना :- पापनाशने विष्णु कैल दरशन। श्रीरङ्गक्षेत्रे तबे करिला गमन ॥ 79 ॥ अनुवाद-महाप्रभुने पापनाशन नामक तीर्थमें भगवान् श्रीविष्णुका दर्शन किया। तब उन्होंने श्रीरङ्गक्षेत्रके लिये प्रस्थान किया ॥ 79 ॥ अनुभाष्य- 'पापनाशन' - कुम्भकोणम्से आठ मील दक्षिण-पश्चिममें स्थित है (ताञ्जोर गेजेटियार)। तिनेभेलि जिलेके अन्तर्गत पालमकोटा नगरसे उनतीस मील । 351