श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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42 श्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला 1/222-223 ] मिलनका वर्णन किया। जो कोई भी इस प्रसङ्गका अनुवाद-श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी श्रवण करता है, उसे श्रीचैतन्यदेवके चरणकमलोंकी कृपाभिलाषा करते हुए कृष्णदास इस श्रीचैतन्यचरितामृतका प्राप्ति होती है॥ 222 ॥ वर्णन कर रहा है॥ 223 ॥ श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ 223 ॥ इति श्रीचैतन्यचरितामृते अन्त्यखण्डे पुनः श्रीरूपसङ्गोत्सवो श्रीचैतन्यचरितामृतके अन्त्यखण्डमें पुनः श्रीरूपसङ्गोत्सव नाम प्रथमः परिच्छेदः। नामक पहले अध्यायका अनुवाद समाप्त।