भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

पृष्ठ 2059, कुल 2549 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2059

42 श्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला 1/222-223 ] मिलनका वर्णन किया। जो कोई भी इस प्रसङ्गका अनुवाद-श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी श्रवण करता है, उसे श्रीचैतन्यदेवके चरणकमलोंकी कृपाभिलाषा करते हुए कृष्णदास इस श्रीचैतन्यचरितामृतका प्राप्ति होती है॥ 222 ॥ वर्णन कर रहा है॥ 223 ॥ श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ 223 ॥ इति श्रीचैतन्यचरितामृते अन्त्यखण्डे पुनः श्रीरूपसङ्गोत्सवो श्रीचैतन्यचरितामृतके अन्त्यखण्डमें पुनः श्रीरूपसङ्गोत्सव नाम प्रथमः परिच्छेदः। नामक पहले अध्यायका अनुवाद समाप्त।