श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें518 श्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला बड़-महा ] ब बड़ बड़ वैष्णव ताँर दर्शनेते 3/141 बसि' कृष्णनाम मात्र करिये 7/79 बहु जन्म पुण्य करे, तार 16/131 बहुदिनेर अपराधे पाइल 3/146 बाउलके कहिह,—लोक 19/20-21 'बाउल' हञा आमि कैलुँ 19/9 'बान्धे सबारे'—ताते अविद्या 5/145 बार बार गोविन्द कहे 10/87 'बालिश'—तथापि 'शिशुप्राय' 5/140 'बासि' विस्वाद नहे, सेइ 10/126 बाहिरे जड़िमा, अन्तरे आनन्द 17/17 बाह्य अर्थ करिबारे करि 3/48 बाह्य प्रकाशिते एस्ब करिला 3/89 बाह्यार्थ येइ लय, सेइ नाश 7/164 बिश, पञ्चाश, दश, बार 6/151 बुझिते ना पारे केह, यद्यपि 14/5 बुद्धि-प्रवेश नाहि, ताते 20/77 बुद्धिभ्रष्ट हैल तोमार गोपालेर 2/94 ब्रह्मलोक-आदि सुख ताँरे 6/136 ब्रह्मस्व-अधिक एइ हय 9/89 ब्रह्मादि-दुर्लभ एइ निन्दये 16/97 ब्रह्मार दुर्लभ तोमार श्रीचरण 12/29 ब्रह्मा-शिव आदि याँर 9/115 ब्रह्मा-शिव-सनकादि पृथिवीते 3/260 'ब्राह्मणेर सेवा',—एइ मोर 13/97 भ 'भकतवत्सल' तुमि, मुइ 11/42 भक्त-चित्ते भक्त-गृहे सदा 6/124 भक्त-ठाञि लुकाइते नारे 3/90 भक्तपदधूलि आर भक्तपद 16/60 भक्त-प्रेमार ये-दशा, ये 18/16 भक्तभाव अङ्गीकारे, ताहा 18/17 भक्त-भक्ति-कृष्ण-तत्त्व 4/219 भक्तभुक्त-शेष,—एइ तिन 16/60 'भक्तशेष' हैले महा-महाप्रसाद 16/59 भक्त-स्वभाव,—अज्ञ-दोष 3/211 'भक्ति', 'प्रेम', 'तत्त्व' कहे 5/85 'भक्ति' बिना कृष्णे कभु नहे 4/58 भक्तिसिद्धान्त-सिन्धु नाहि 5/103 भक्तिसुख-आगे 'मुक्ति' 3/194 भक्तेर प्रेम-विकार देखि' 18/15 भजनेर मध्ये श्रेष्ठ नवविधा 4/70 भद्राभद्र-वस्तुज्ञान नाहि 4/174 भवसिन्धु तरिवारे आछे यार 11/107 भागवत पड़, सदा लह 13/121 भागवतार्थ शुनिते आमि नहि 7/78 भागवते स्वामीर् व्याख्यान 7/109 भावग्राही महाप्रभु स्नेहमात्र 10/18 भावानुरूप श्लोक पड़ेन राय 17/6 भावुकेर सिद्धान्त शुन, पण्डितेर 3/191 भारत-भूमिते जन्मि' एइ 4/98 भाल कैल, वैरागीर धर्म 6/222 भाल ना खाइबे, आर भाल 6/236 भाल-मन्द-किछु आमि 5/62 भाल हैल—जानिया से आपनि 6/280 भितर-घरे गेला गोविन्द प्रभुरे 10/89 भूत नहे, तँहो-कृष्णचैतन्य 18/64 भूत-प्रेत आमार ना लागे 18/57 भोके मरि' गेनु, मोरे वासा 12/20 म मड़ा रूप धरि' रहे उत्तान 18/54 मदनमोहन-नाट, पसारि 19/98 मधुर प्रसङ्ग इहार काव्य 1/198 मधुर-मर्द्दने प्रभुर परिश्रम 10/90 मध्याह्ने आसिमु, एबे याइ 12/122 'मनुष्य' नहे राय, कृष्णभक्ति 5/71 मने मने जपे, मुखे ना 16/72 मनेर सन्तोषे ताँरे कैला 3/89 मन्त्र पाञा कार आगे 16/71 मन्द मन्द करितेछेन संख्या 11/17 मर्द्दनिया एक राख करिते 12/112 मर्यादा-पालन हय साधुर 4/130 मर्यादा राखिले, तुष्ट हय मोर 4/132 मर्यादा-लङ्घन आमि ना पारों 4/166 मर्यादा-लङ्घने लोक करे 4/131 महदनुग्रह-निग्रहेर साक्षी दुइजने 8/30 महदपराधेर हैल फल अद्भुत 3/144 महानुभवेर एइमत 'स्वभाव' 5/78 महान्तेर अपमान ये देश 3/163 महा-अपराध हय प्रभुर 10/99 महाप्रभु-नित्यानन्द, दोहार 19/109 महाप्रभु पादाङ्गुष्ठ तार मुखे 12/50 महाप्रभुर आगे, आर देखि' 4/12 महाप्रभुर आसन डाहिने पातिया 6/107 महाप्रभुर कृपा-ऋण के 12/83 महाप्रभुर दत्त माला मननेर 13/134 महाप्रभुर दर्शन पाय कोन 6/82 'महाप्रभुर प्रसाद' जानि' ताँहारे 13/52 महाप्रभुर भक्तगणेर दुर्गम 5/21 महाप्रभुर भक्तगणेर वैराग्य 6/220 महाप्रभुर श्रीहस्ते अल्प ना 11/82 महाप्रसाद आनियाछ, केमते 11/19 महाविषय कर, किबा विरक्त 9/141 महाभागवत, कृष्ण प्राणधन 2/96 महाभागवत तुमि,—तोमार 3/250 महाभागवत तँहो, सरल 16/6 महाभागवत हरिदास—परम 11/105