श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाष्य विशेष एक सम्प्रदाय-संरक्षणकी भूमिका अवलम्बन करेगा, ऐसी आशाका हम पोषण करते हैं। श्रीचैतन्यचरितामृतकी एक असम्पूर्ण टीका श्रीमद् विश्वनाथ चक्रवर्तीपादने की थी, ऐसा जाना जाता है। जगद्गुरु श्रील प्रभुपादने उनके जीवनी-प्रबन्धमें भी यह जानाया है। किन्तु वर्तमान समयमें उनके नामसे जो टीका प्रचलित है, उसमें किसी-किसी अंशमें सिद्धान्त विषयमें संशयका क्षेत्र उदित हुआ है, ऐसा देखा जाता है। और भी किसी संस्करणमें उन सब अंशोंमें उक्त टीकाका प्रतिवाद भी देखा जाता है। श्रील चक्रवर्ती ठाकुरका अप्रतिवाद योग्य और सर्वजन-स्वीकार्य जो विचारवैशिष्ट्य उनकी अन्यान्य सभी टीकाओंमें उपलब्ध हैं, उसका अभाव वर्तमान टीकामें अनुभव होनेसे, उक्त टीका अन्य किसी चक्रवर्ती महाशयके द्वारा लिखी गयी है, ऐसा असम्भव नहीं है। श्रीरूपानुग-गुरु-वैष्णव-दासानुदास श्रीभक्तिवेदान्त वामन xxvi | श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत