भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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[ ५/१२१-१३२ एक कलाके रूपमें कहा है, उन श्रीनित्यानन्द प्रभुकी लीलाओंको कौन जान सकता है ? ॥ १२१-१२५ ॥ अमृतप्रवाह भाष्य - 'शेषता' अर्थात् चरम दास्य ॥ १२४ ॥ अनुभाष्य- (भाः १०/३/२५) - “भवानेकः शिष्यते शेषसंज्ञः ।” अर्थात् “प्रलयके बाद आप ही रहते हैं, इसलिये आप 'शेष' कहलाते हैं।” १२४॥ श्रीनित्यानन्दको 'अनन्त' अथवा श्रीकृष्णको 'विष्णु' कहना दोषपूर्ण नहीं :- एसब प्रमाणे जानि नित्यानन्द-तत्त्व-सीमा। ताँहाके 'अनन्त' कहि, कि ताँर महिमा ॥ १२६ ॥ अथवा भक्तेर वाक्य मानि सत्य करि'। सकल सम्भवे ताँते, याते अवतारी ॥ १२७ ॥ अवतार-अवतारी-अभेद, ये जाने। पूर्वे यैछे कृष्णके केहो काहो करि' माने ॥ १२८ ॥ अनुवाद-इस सब प्रमाणोंसे श्रीनित्यानन्द प्रभुके तत्त्वकी सीमाको जाना जाता है। श्रीनित्यानन्द प्रभुको 'अनन्त' कहनेसे क्या उनकी महिमा कही जाती है? अर्थात् उनको 'अनन्त' कहना भी उनकी महिमाको पूर्ण व्यक्त नहीं करना है। तो भी भक्तोंके इन वाक्योंको मैं सत्य मानता हूँ। वे अवतारी हैं, इसलिये उनमें सभी कुछ सम्भव है। भक्तलोग अवतारी और अवतारको अभेद जानते हैं। जैसे पूर्वकालमें अलग-अलग भक्तोंने श्रीकृष्णको अलग-अलग तत्त्वके रूपमें माना है॥ १२५-१२८ ॥ अमृतप्रवाह भाष्य - जो अवतार और अवतारीका भेद नहीं जानते हैं, वे जैसे पहले श्रीकृष्णको 'वामन' आदिके समान मानते हैं, उसी प्रकार अभेदकारी व्यक्ति श्रीनित्यानन्दको भी 'अनन्त' आदि कहते हैं। वास्तवमें भक्तलोग जब इस प्रकारसे कहते हैं, तो वह मिथ्या नहीं है, क्योंकि सर्वोच्च तत्त्वमें सभी कुछ ही सम्भव है ॥ १२८ ॥ विभिन्न अवतार रूपोंमें अवतारीकी ही संज्ञा :- केहो बले, कृष्ण साक्षात् नरनारायण। केहो कहे, कृष्ण हय साक्षात् वामन ॥ १२९ ॥ केहो कहे, कृष्ण क्षीरोदशायी-अवतार। असम्भव नहे, सत्य वचन सबार ॥ १३० ॥ कृष्ण यबे अवतरे सर्वांश-आश्रय। सर्वांश आसि' तबे कृष्णेते मिलय ॥ १३१ ॥ येइ येइ रूपे जाने, सेइ ताहा कहे। सकल सम्भवे कृष्णे, किछु मिथ्या नहे ॥ १३२ ॥ अनुवाद-कोई कहते हैं कि श्रीकृष्ण साक्षात् नर-नारायण हैं, कोई कहते हैं कि श्रीकृष्ण साक्षात् वामन हैं, कोई कहते हैं कि श्रीकृष्ण क्षीरोदशायीके अवतार हैं- यह सब असम्भव ३०६ | श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत