श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५/१४९-१५४ ] अनुवाद—श्रीनित्यानन्द स्वरूप पहले रामलीलामें लक्ष्मण थे। उन्होंने श्रीरामचन्द्रकी छोटे भाईके रूपमें सेवा की थी॥१४९॥ अनुभाष्य—दशनामी दण्डी दलमें ब्रह्मचारीकी उपाधियाँ चार प्रकार हैं,—'स्वरूप', 'आनन्द', 'प्रकाश' और 'चैतन्य'। श्रीनित्यानन्द प्रभु तीर्थभ्रमणके समय जिस संन्यासीके पास थे, उनकी 'तीर्थ' या 'आश्रम' उपाधि होनेके कारण उनका ब्रह्मचारी नाम 'नित्यानन्द-स्वरूप' हुआ था॥१४९॥ रामेर चरित्र सब,—दुःखेर कारण। स्वतन्त्र लीलाय दुःख सहेन लक्ष्मण॥१५०॥ निषेध करिते नारे, याते छोट भाइ। मौन धरि' रहे लक्ष्मण मने दुःख पाइ'॥१५१॥ कृष्ण अवतारे ज्येष्ठ हैला सेवार कारण। कृष्णके कराइल नाना सुख आस्वादन॥१५२॥ अनुवाद—श्रीरामचन्द्रकी लीला बहुत दुःखपूर्ण है। लक्ष्मणने अपनी इच्छासे उन दुःखोंको सहन किया। लक्ष्मण छोटे भाई होनेके कारण श्रीरामचन्द्रको किसी भी कार्यके लिये मना नहीं कर पाते थे। वे मौन रहकर मन-ही-मनमें दुःख सहन करते थे। इसलिये कृष्णावतारमें उन्होंने बड़े भाई श्रीबलरामके रूपमें श्रीकृष्णकी सब प्रकारसे सेवा की और उन्हें नाना प्रकारसे सुखका आस्वादन कराया॥१५०-१५२॥ श्रीकृष्ण-बलराम अंशी और श्रीराम-लक्ष्मण अंश; अंशीके अवतारकालमें अंशका उनमें प्रवेश :— राम-लक्ष्मण—कृष्ण-रामेर अंशविशेष। अवतारकाले दोंहे दोंहाते प्रवेश॥१५३॥ अनुवाद—श्रीराम-लक्ष्मण श्रीकृष्ण-बलरामके अंश हैं। जब श्रीकृष्ण-बलराम अवतार ग्रहण करते हैं, तब श्रीराम-लक्ष्मण दोनों उन दोनोंमें प्रवेश कर जाते हैं॥१५३॥ अनुभाष्य—लघुभागवतामृतमें श्रीराघवेन्द्र-तत्त्व वर्णन प्रसङ्गमें संख्या २०का मर्मानुवाद— “विष्णुधर्मोत्तरमें राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्नको क्रमशः वासुदेव, सङ्कर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्धके अवतार तथा पद्मपुराणमें श्रीरामचन्द्रको नारायण और लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्नको क्रमशः 'शेष', 'चक्र' तथा 'शंख' कहा गया है॥”१५३॥ सेइ अंश लञा ज्येष्ठ-कनिष्ठाभिमान। अंशांशि-रूपे शास्त्रे करये व्याख्यान॥१५४॥ अनुवाद—श्रीबलराम और श्रीकृष्ण बड़े और छोटे भाईके रूपमें लीला करते हैं। परन्तु शास्त्र उनका वर्णन अंश और अंशीके रूपमें करते हैं॥१५४॥ अनुभाष्य—लघुभागवतामृतमें लीला-अवतार निरूपण प्रसङ्गमें ७९-संख्याका अनुवाद— “स्कन्दपुराणमें रामगीतामें लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न—इन तीनोंको श्रीरामका व्यूह कहा गया है॥”१५४॥ पाँचवाँ अध्याय | ३१३